
मध्य प्रदेश: सोशल मीडिया लाइक-व्यूज के लिए कमरे में बना डाली फर्जी हाईकोर्ट, आरोपी गिरफ्तार
जबलपुर- 18 अगस्त। मध्य प्रदेश के जबलपुर में सिविल लाइन थाने में एक शिकायत के बाद एक आरोपी पर मामला दर्ज किया गया है।
मंगलवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार सोशल मीडिया पर लाइक और व्यूज हासिल करने के लिए सिंगरौली जिले के बैढ़न क्षेत्र के पिपराझापी निवासी 27 वर्षीय अमित तिवारी ने अपने घर के कमरे में ही फर्जी अदालत बना डाली। आरोपी बड़ी स्क्रीन पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और अधिवक्ताओं के चित्र प्रदर्शित कर ऑनलाइन सुनवाई का स्वांग रचता और हिंदी-अंग्रेजी में कानूनी बहस के वीडियो बनवाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करता था। मामला सामने आने के बाद हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
पूछताछ में सामने आया कि अमित ने कानून की पढ़ाई शुरू की थी, लेकिन डिग्री पूरी नहीं कर सका। न्यायालय में वकीलों की बहस देखकर उसे इस तरह वीडियो बनाने का विचार आया। वह मित्रों की मदद से वीडियो रिकॉर्ड कराता था। पुलिस के अनुसार 7 जुलाई 2026 को एक वृद्ध ग्रामीण अपनी पारिवारिक समस्या के संबंध में कानूनी अर्जी लगवाने उसके पास पहुंचा था। आरोपी आधुनिक एआई सॉफ्टवेयर की मदद से सोशल मीडिया सामग्री तैयार कर उससे कमाई भी करता था। उसका पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड भी सामने आया है।
निर्देश के बाद जबलपुर के सिविल लाइन्स थाना पुलिस ने जीरो पर एफआईआर दर्ज कर जांच डायरी बैढ़न थाना पुलिस को भेजी। स्थानीय पुलिस ने कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। पुलिस ने उसके कमरे से कंप्यूटर, लैपटॉप सहित अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं।
पुलिस के मुताबिक आरोपी ने कमरे को वरिष्ठ अधिवक्ता के कार्यालय जैसा सजा रखा था। दो कंप्यूटर, लैपटॉप, इंटरनेट उपकरण और कानून की किताबों के बीच बड़ी टीवी स्क्रीन लगाई गई थी। स्क्रीन पर अदालत की कार्यवाही से जुड़े दृश्य दिखाकर आरोपी घूमने वाली कुर्सी पर बैठकर करीब पांच मिनट तक कानूनी तर्क देता था। वीडियो में वह शासन को अपने आदेश मानने और मनगढ़ंत चार्जशीट नहीं लगाने जैसी बातें कहते हुए दिखाई देता था। तैयार वीडियो पहली नजर में वास्तविक ऑनलाइन अदालती कार्यवाही जैसा प्रतीत होता था।
सितंबर 2025 में उत्तर प्रदेश के शक्तिनगर थाने में विवादित ऑनलाइन पोस्ट को लेकर उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज हुआ था। पुलिस ने जब्त इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को तकनीकी जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेज दिया है। वीडियो बनाने में सहयोग करने वाले अन्य लोगों की भूमिका और आरोपी की सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।



