
MADHUBANI:- 10 साल बाद फिर वही तारीख-27 अक्टूबर को ही ट्रैप हुए थे जयनगर के तत्कालीन एसडीएम-डीएसपी, अब ट्रैफिक डीएसपी चढ़े निगरानी के हत्थे
मधुबनी, 27 अक्टूबर। तारीख एक ही, महीना एक ही और कार्रवाई भी एक जैसी। मधुबनी में निगरानी की दो बड़ी कार्रवाइयों का संयोग इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। 27 अक्टूबर 2016.को निगरानी विभाग की टीम ने जयनगर अनुमंडल कार्यालय में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ दो बड़े अधिकारियों को धर दबोचा था। टीम ने तत्कालीन एसडीएम गुलाम मुस्तफा अंसारी और तत्कालीन डीएसपी चंदन पुरी को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया था। छापेमारी के दौरान तत्कालीन डीएसपी चंदन पुरी के पास से 50 हजार और तत्कालीन एसडीएम गुलाम मुस्तफा अंसारी के पास से एक लाख रुपये रिश्वत के बरामद हुए थे। एक ही दिन एसडीएम-डीएसपी की गिरफ्तारी से पूरे बिहार में सनसनी फैल गई थी। ठीक 10 साल बाद, फिर 27 अक्टूबर 2026 को ही निगरानी ने मधुबनी के ट्रैफिक डीएसपी सुजीत कुमार को 30 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया।
मधुबनी में कई अधिकारी पहले भी चढ़ चुके हैं हत्थे
1. रहिका सीओ और नाजिर: पिछले साल रहिका अंचल में सीओ अभय कुमार को 17 हजार और नाजिर आदित्य कुमार को 13 हजार रिश्वत लेते पकड़ा गया था। भारतमाला प्रोजेक्ट की जमीन रिपोर्ट के नाम पर एक लाख की मांग की जा रही थी।
2. बेनीपट्टी का क्लर्क: अप्रैल 2025 में बेनीपट्टी सर्कल के क्लर्क साकेत कुमार को 10 हजार घूस लेते दबोचा गया। अतिक्रमण हटाने के लिए 30 हजार की मांग थी। उसके साथ दलाल परमानंद झा भी पकड़ा गया था।
3. उद्योग विभाग का MSME मित्र: 2024 में मधुबनी उद्योग केंद्र के MSME मित्र मोहम्मद मुसाहिद को 15 हजार घूस लेते पकड़ा गया था।
4. खुटौना थानाध्यक्ष: 2014 में खुटौना थानाध्यक्ष महाकांत सिंह को एक लाख रुपये रिश्वत लेते थाना परिसर से ही गिरफ्तार किया गया था।
5. राजस्व कर्मचारी को सजा: रहिका के तत्कालीन राजस्व कर्मचारी नारायण झा को 2014 में 5 हजार रिश्वत लेते पकड़ा गया था, जिसे हाल ही में विशेष निगरानी अदालत मुजफ्फरपुर ने 4 साल की सजा सुनाई है।



