
बिहार में राजस्व विभाग सख्त: आधा दर्जन और CO पर गिरी गाज, मंत्री दिलीप जायसवाल ने की कार्रवाई, एक पर FIR का निर्देश
पटना- 27 अक्टूबर। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने लापरवाही और अनियमितता बरतने वाले अंचल अधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है। राजस्व मंत्री दिलीप जायसवाल ने 26 अक्टूबर को संचिका में आधा दर्जन तत्कालीन सीओ पर दंड और आरोप पत्र को मंजूरी दी है। इसमें एक सीओ पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करने का भी निर्देश दिया गया है। विभाग द्वारा जारी विवरणी के अनुसार कार्रवाई का ब्योरा इस प्रकार है। ओम प्रकाश भगत, तत्कालीन अंचल अधिकारी, ठाकुरगंज, किशनगंज पर FIR का आदेश दिया गया है।
इन पर आरोप है कि इन्होंने जेबा बख्तियार, जाति- शेख को पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण-पत्र निर्गत कर दिया। जिसके कारण बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 की धारा-135 के तहत अहर्ता नहीं रहने के बावजूद पिछड़े वर्ग की सूची-1 में शामिल जातियों हेतु आरक्षित पद के विरुद्ध मुखिया निर्वाचित हो गईं।
मंत्री ने इनकी दो वेतनवृद्धि संचयी प्रभाव के साथ रोकने और आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज करने का आदेश दिया है। साथ ही संबंधित राजस्व अधिकारी और कर्मचारी पर भी FIR दर्ज कर आरोप पत्र गठित करने का आदेश दिया गया है। निश्चल प्रेम, तत्कालीन अंचल अधिकारी, किशनगंज। बिना कार्यादेश के अग्रिम भुगतान करने एवं वित्तीय अनियमितता का आरोप। मामले की जांच हेतु अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने का आदेश।
जितेन्द्र कुमार सिंह, तत्कालीन अंचल अधिकारी, अकोढ़ीगोला, रोहतास। इनपर दाखिल-खारिज वाद में आपत्ति दाखिल करने की तिथि के पूर्व ही वाद का निष्पादन करना और संयुक्त जमाबंदी होने के बावजूद सभी रैयतों को सूचना दिए बिना एवं बंटवारा साक्ष्य के बिना दाखिल-खारिज स्वीकृत करना है। इनकी तीन वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव के साथ रोकने का दंड निर्धारित किया गया है।
ललन कुमार मंडल, तत्कालीन अंचल अधिकारी, बरारी, कटिहार। इनपर अतिक्रमित भूमि को खाली नहीं कराना एवं सरकारी आश्वासन संख्या 660/2023 का ससमय अनुपालन नहीं करना। आरोप पत्र गठित करने का आरोप है।
महेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन अंचल अधिकारी, मनसाही, कटिहार, सम्प्रति सेवानिवृत्त।
भूमि सुधार उपसमाहर्ता, कटिहार के पारित आदेश के विपरीत एवं स्वत्व वाद लंबित रहते नामांतरण वाद को स्वीकृत करना। आरोप पत्र गठित। राज नारायण राजा, तत्कालीन अंचल अधिकारी, हथुआ, गोपालगंज। इनपर विभागीय निदेश के विपरीत दाखिल-खारिज वादों को अधिक अवधि तक लंबित रखना, चार वादों को एक वर्ष से अधिक लंबित रखने के बिन्दु पर बार-बार स्मार के बावजूद कारण-पृच्छा समर्पित नहीं करना। इनकी दो वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव पर रोक लगाई गई है।



