
महासप्तमी पर माँ कालरात्रि की पूजा से ही दरिद्रता का नाश: गरीबी उन्मूलन दिवस और कालरात्रि पूजा का अद्भुत संयोग: विजय कुमार
मधुबनी, 03 अक्टूबर। इस वर्ष 17 अक्टूबर को एक अद्भुत धार्मिक और सामाजिक संयोग बन रहा है। इसी दिन अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस है और इसी दिन शारदीय नवरात्रि की महासप्तमी भी है। महासप्तमी के दिन माता दुर्गा के सातवें स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है। इस संयोग पर चर्चा करते हुए फुलपरास के पूर्व प्रत्याशी व RJV राष्ट्रीय जन विकास पार्टी, बिहार (प्रस्तावित) के संस्थापक विजय कुमार ने कहा कि माँ कालरात्रि अपने भक्तों के सारे दुःख, दरिद्रता, भय और अंधकार का नाश करती हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जहाँ माँ कालरात्रि की कृपा होती है, वहाँ नकारात्मकता और दरिद्रता नहीं टिकती।
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का उद्देश्य गरीबी को दूर करना
विजय कुमार ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस का उद्देश्य केवल आर्थिक गरीबी को दूर करना नहीं, बल्कि भय, अशिक्षा और अंधकार रूपी गरीबी को भी दूर करना है। माँ कालरात्रि का स्वरूप ही हमें सिखाता है कि अंधकार पर प्रकाश की और गरीबी पर समृद्धि की विजय होती है।
माँ कालरात्रि से प्रार्थना जीवन में समृद्धि का उजाला फैले
उन्होंने आह्वान किया कि इस महासप्तमी पर लोग माँ कालरात्रि से प्रार्थना करें कि हर घर से गरीबी रूपी अंधकार दूर हो और हर जीवन में समृद्धि का उजाला फैले।
गरीबी के खिलाफ लाखों लोगों को एकजुट किया
गौरतलब है कि अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस की शुरुआत 17 अक्टूबर 1987 को पेरिस में हुई थी, जब मानवाधिकार कार्यकर्ता फादर जोसेफ व्रेसिंस्की ने गरीबी के खिलाफ लाखों लोगों को एकजुट किया था। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने 22 दिसंबर 1992 को प्रस्ताव पारित कर हर वर्ष 17 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस मनाने की घोषणा की और पहली बार यह दिवस 1993 में मनाया गया। इसका उद्देश्य विश्व से गरीबी, भुखमरी और असमानता को समाप्त करना है।



