
…जब बिपिन रावत ने कहा था ‘गाजीपुर है वीरों की धरती
गाजीपुर-08 दिसम्बर। देश के पहले सीडीएस प्रमुख बिपिन रावत उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत और समेत 13 जवानों का सेना हेलीकॉप्टर दुर्घटना में निधन हो गया। इस दुखद घटना से पूरे देश में शोक का माहौल व्याप्त है। कुछ इसी तरह का माहौल उत्तर प्रदेश का जनपद गाजीपुर में भी देखने को मिला है। जनपद में भी बिपिन रावत व मधुलिका रावत के कुछ वर्षों पूर्व एक कार्यक्रम में उपस्थित होने की यादें लोगों के जेहन में घूमने लगी है।
10 सितम्बर 2017 को तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष विपिन रावत अपनी धर्मपत्नी मधुलिका रावत के साथ परमवीर चक्र शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस पर गाजीपुर जनपद के धामपुर गांव में पहुंचकर शहीद अब्दुल हमीद को श्रद्धांजलि अर्पित किया थे। उन्होंने मंच के माध्यम से कहा था कि गाजीपुर वीरों की धरती है।
इस दौरान उन्होंने कहा था कि मुझे शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत समारोह में निमंत्रण देकर बुलाया गया। इसके लिए मैं अपने आपको गर्व महसूस कर रहा हूँ। मैं यहां आकर धन्य हो गया। हमें सोचना हैं कि उनकी शहादत बेकार ना जाये। गाजीपुर की जो धरती है, यहां से लोग लगातार सेना में आकर देश के लिए अपना योगदान देते हैं। इतना ही नहीं उस समय उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित युवाओं का उत्साह देखते हुए कहा था कि मैं यही चाहूंगा कि ये सिलसिला यूं ही चलता रहे और यहां से और भी नौजवान सेना में ऐसे भी भर्ती होते रहें। देश के लिए योगदान देने वाली गाजीपुर की परम्परा को कायम रखें। मैंने देखा कि यहां के युवाओं का सेना के प्रति तो जोश है, उसे कायम रखा है और जल्दी ही हम यहां से नौजवानों के लिए भर्ती का सिलसिला शुरू करने वाले हैं। इस कार्यक्रम में धामूपुर गांव में आयोजित कार्यक्रम में सेनाध्यक्ष व उनकी धर्मपत्नी मधुलिका रावत ने शहीद वीर अब्दुल हमीद की पत्नी रसूलन बीबी को सम्मानित किया था। परिवारों से मिलकर उनका हालचाल लिया था।
अपनी बेबाक हाजिर जवाबी से लोगों का मन मोह लिए थे बिपिन रावत
परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के शहादत दिवस के अवसर पर 10 सितम्बर 2017 को उनके पैतृक गांव पहुंचे बिपिन रावत ने पत्रकार वार्ता के दौरान अपनी हाजिर जवाबी से लोगों का मन मोह लिया था। कार्यक्रम के उपरांत पत्रकार वार्ता के दौरान जब पत्रकारों ने सवाल पूछा कि सबसे बड़ा दुश्मन चीन या पाकिस्तान तो उन्होंने कहा हमारे लिए देश सबसे बड़ा है और इसके तरफ उठने वाली हर निगाह हमारी दुश्मन है। उन्होंने कहा था कि हमारी सेना दुश्मन की आंख में आंख डालकर जवाब देने में सक्षम है। वहीं एक पत्रकार द्वारा पूछा गया कि क्या बातचीत के जरिए कश्मीर का मसला हल हो सकता है तो बिपिन रावत ने तपाक से जवाब दिया कि बातचीत करना सरकार और राजनेताओं का काम है। हमारी भाषा कुछ और ही होती है। हम देश की सीमाओं की रक्षा हो या मसले का हल, अपनी भाषा में देने में सक्षम है।



