भारत

 वैश्विक कृषि साझेदारी के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है भारत का दृष्टिकोण: शिवराज

इंदौर में ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन का शुरू

इंदौर- 12 जून। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत हमेशा वैश्विक एकता, शांति और सहयोग का पक्षधर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत का दृष्टिकोण “युद्ध नहीं शांति, संघर्ष नहीं समन्वय” पर आधारित है, जो वैश्विक कृषि साझेदारी के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत बन सकता है।

केन्द्रीय कृषि मंत्री चौहान शुक्रवार को मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी और स्वच्छता के प्रतीक इंदौर में शुरू हुए ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भारत की कृषि शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और वैश्विक सहयोग की प्रतिबद्धता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में “वसुधैव कुटुंबकम” की भावना को आगे बढ़ाते हुए इस मंत्र के साथ दुनिया को एक परिवार मानते हुए शांति, समन्वय और साझेदारी आधारित विकास पर जोर दिया।

छोटे किसानों को सशक्त बनाने पर भारत का फोकस—

केंद्रीय मंत्री चौहान ने “अतिथि देवो भवः” की भारतीय परंपरा का उल्लेख करते हुए सभी प्रतिनिधियों का हार्दिक स्वागत किया और कहा कि यह संवाद विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के सामने मौजूद चुनौतियों- जैसे जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव और बाजार की अनिश्चितता का सामूहिक समाधान खोजने के लिए महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि छोटे किसान मजबूत होते हैं, तो दुनिया की खाद्य सुरक्षा स्वतः सुदृढ़ हो जाएगी।

कृषि विकास में 4.5% वार्षिक वृद्धि, खाद्य उत्पादन 376 मिलियन टन तक पहुंचा—

उन्होंने भारत की कृषि उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र में लगभग 4.5 प्रतिशत की औसत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। देश का कुल खाद्य उत्पादन बढ़कर लगभग 376 मिलियन टन तक पहुंच गया है। गेहूं उत्पादन 118 मिलियन टन के करीब पहुंचा, जबकि बागवानी उत्पादन 378 मिलियन टन से अधिक हो गया है। मछली उत्पादन भी बढ़कर 19 मिलियन टन से अधिक हो चुका है।

उन्होंने बताया कि भारत विश्व का सबसे बड़ा खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम संचालित करता है, जिसके माध्यम से बड़ी आबादी को खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है। उन्होंने किसानों के योगदान को सराहते हुए कहा कि यह उपलब्धियां उनके कठिन परिश्रम और सरकार की संवेदनशील नीतियों का परिणाम हैं।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि भारत में लगभग 43 प्रतिशत कार्यबल कृषि से जुड़ा है और यह क्षेत्र न केवल खाद्य सुरक्षा बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में चल रही योजनाओं-जैसे उन्नत बीज, सिंचाई, तकनीक और किसान सहायता कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए बताया कि इनसे किसानों को व्यापक लाभ मिला है।

उन्होंने छोटे और सीमांत किसानों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत के लगभग 87 प्रतिशत किसान इस श्रेणी में आते हैं और इन्हें सशक्त बनाना ही समावेशी विकास की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत करोड़ों किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाया जा रहा है, जबकि किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाएं किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रही हैं।

उन्होंने प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए कहा कि रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग और मिट्टी के स्वास्थ्य को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने मध्य प्रदेश से शुरू किए गए देशव्यापी “खेत बचाओ अभियान” का उल्लेख करते हुए बताया कि इसके माध्यम से किसानों तक वैज्ञानिक जानकारी और सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं, जिससे प्राकृतिक खेती और जैविक इनपुट्स का उपयोग बढ़ रहा है।

महिला और युवा शक्ति कृषि परिवर्तन का आधार

केंद्रीय मंत्री चौहान ने महिला सशक्तीकरण को कृषि विकास का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि आज करोड़ों महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नेतृत्व कर रही हैं। “ड्रोन दीदी” जैसी पहलें ग्रामीण भारत में तकनीकी और सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण बन रही हैं। उन्होंने युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कृषि में नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे कृषि क्षेत्र अधिक आकर्षक और आधुनिक बन रहा है।

उन्होंने कहा कि दुनिया की लगभग आधी आबादी ब्रिक्स देशों में रहती है और यहाँ वैश्विक कृषि उत्पादन का 43% से ज़्यादा हिस्सा होता है, इसलिए टिकाऊ खेती के भविष्य के लिए इन देशों के बीच सहयोग बहुत महत्वपूर्ण है। हमने कृषि व्यापार, रिसर्च, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी शेयरिंग में सहयोग बढ़ाने के लिए बेहतरीन तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया और द्विपक्षीय बातचीत भी की। कल होने वाले संयुक्त घोषणा-पत्र का इंतज़ार है। मुझे पूरा भरोसा है कि इंदौर घोषणा-पत्र ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करने और वैश्विक खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाने में योगदान देगा।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने ब्रिक्स देशों से अपील की कि सभी मिलकर छोटे किसानों को सशक्त बनाने, खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और सतत कृषि विकास के लिए सामूहिक प्रयास करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह संवाद अनुभवों के आदान-प्रदान और नीतिगत सहयोग के माध्यम से वैश्विक कृषि को नई दिशा देगा।  इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित थे।

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