
कपिलेश्वर स्थान मंदिर में खंडित प्रतिमा की पूजा से श्रद्घालुओं में निराशा, कुमार कपिलेश्वर सिंह से लगाई गुहार
मधुबनी- 13 जून। रहिका प्रखंड के प्रसिद्ध कपिलेश्वर स्थान मंदिर के परिसर स्थित श्रद्घालुओं के असीम आस्था का प्रतीक माता पार्वती मंदिर में स्थापित प्रतिमा सालों से खंडित होने की चर्चा से श्रद्घालुओं में निराशा देखी जा रही है। हालांकि निराशा के बाद भी प्रतिदिन कपिलेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना को पहुंचने वाले श्रद्घालु पार्वती मंदिर में पूजा-अर्चना करते है। स्थानीय श्रद्घालुओं ने बताया कि करीब एक दशक से माता पार्वती की प्रतिमा खंडित होने की बात सुनते आ रहे है। स्थानीय पंडा समाज और राज दरभंगा को खंडित प्रतिमा की सच्चाई से अवगत होकर दूसरी प्रतिमा प्रतिष्ठापित की पहल किया जाना चाहिए। हालांकि इस मसले पर माता पार्वती मंदिर में पूजा-पाठ करने वाले पंडा कुछ भी बताने से इंकार करते है, जबकि बाबा कपिलेश्वर मंदिर के कई पंडा और स्थानीय लोग माता पार्वती मंदिर की प्रतिमा खंडित होने की पुष्टि करते है। वहीं, श्रद्धालुओं ने बताया कि दशक पूर्व दरभंगा महारानी के सहयोग से उनके देखरेख में माता पार्वती की प्रतिमा प्रतिष्ठापित कराई गई थी। इसके बाद राज दरभंगा और स्थानीय पंडा समाज द्वारा लगातार पार्वती मंदिर और मंदिर में प्रतिष्ठापित माता की प्रतिमा की उपेक्षा होती रही है।
श्रद्घालुओं ने बताया कि माता पार्वती मंदिर का रंग-रोगन दो दशक से नहीं हो सका है। राज दरभंगा के तहत माता पार्वती मंदिर के नाम पर यहां 52 बीधा जमीन है। जिसमें 10 एकड़ का पोखर, 5 एकड का बगीचा के अलावा परिसर में 100 से अधिक दुकान किराए पर दिए गए है। पोखर, बगीचा और दुकानों के किराया के रुप में सालाना 20-30 लाख तक की आमदनी होने के बाद भी खंडित प्रतिमा नहीं बदली जा रही है। कुछ कर्मियों द्वारा पोखर, बगीचा और दुकानों से होने वाली लाखों की आमदनी को कम दिखाकर अपनी जेब भर रहे है। पंडाओं का दबदबा और न्यास की उदासीनता से मंदिर की संपति उगाही का जरिया बनकर रह गया है। अनेकों स्थानीय लोगों को मंदिर के नाम की जमीन पर अवैध कब्जा दिलाकर सालाना लाखों रुपये की उगाही की जा रही है। मंदिर का विकास और श्रद्घालुओं की सुविधा का कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है। वहीं, श्रद्धालुओं से मिलने वाला चढ़ावा, आभूषण का लेखा-जोखा नहीं रखा जाता है। श्रद्धालुओं ने राज दरभंगा के कुमार कपिलेश्वर सिंह से माता पार्वती मंदिर की खंडित प्रतिमा की जगह नई प्रतिमा प्रतिष्ठापित करने, मंदिर की संपत्ति से होने वाली आमदनी की जांच कराने की मांग की है।
श्रद्घालुओं ने कहा कि इस दिशा में राज दरभंगा द्वारा समय रहते कोई कदम नहीं उठाया जाता है तो इसकी शिकायत बिहार राज्य धार्मिक न्यास, पटना से की जाएगी। वहीं, स्थानीय संतोष झा ने बताया कि गरुड़ पुराण और वास्तु शास्त्र के अनुसार खंडित प्रतिमा की पूजा नहीं करनी चाहिए। ऐसी प्रतिमा पूजा स्थल की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित कर सकती हैं। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवी-देवताओं की प्रतिमाओं का विशेष सम्मान करना चाहिए।लेकिन प्रतिमा खंडित हो जाए, तो उसे बदल देना चाहिए। वास्तु शास्त्र में खंडित प्रतिमा को लेकर कई बातें बताई गई हैं। जिसमें पूजा स्थान का गलत दिशा, मंदिर के आसपास गंदगी या भारी सामान रखना, नियमित पूजा-पाठ और साफ-सफाई का अभाव, काफी पुरानी या कमजोर प्रतिमा होना माना जाता रहा है। हालांकि, कई बार प्रतिमा सामान्य कारणों से भी खंडित हो सकती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार खंडित प्रतिमा को लंबे समय तक नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा जिले के अनेकों मंदिरों में दशकों से कई खंडित प्रतिमाओं की पूजा की जा रही है।



