
MADHUBANI: पुलिस-तस्कर के गठजोड़ में गांजा तस्करी पर कार्रवाई के बाद भी उठ रहे सवाल
बासोपट्टी थानाध्यक्ष के संलिप्तता पर क्यों दर्ज नहीं हुई एफआईआर
मधुबनी-15 जून। जिले के बासोपट्टी में एसटीएफ के गांजा तस्करों पर कार्रवाई से मधुबनी पुलिस एक बार फिर दागदार हो गई। गांजा की बरामदगी और इससे जुड़े तस्करों के गिरफ्तारी के बाद एक्टिव मधुबनी पुलिस ने कार्रवाई में तेजी ला दी और दामन में लगे तस्कर के गठजोड़ के दाग़ को मिटाने के लिए तत्काल डायल-112 वाहन के ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया, जो तस्करों को सेफ स्पेश देने के लिए स्कॉर्ट कर रहा था। घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पुलिस अधीक्षक योगेंद्र कुमार और कुछ देर बाद मिथिला प्रक्षेत्र के डीआईजी मनोज कुमार तिवारी भी पहुंच गए। सूत्रों की माने तो पुलिस के संलिप्तता पर जांच हुई। हालांकि, जांच के दौरान क्या क्या तथ्य सामने आए, इसकी जानकारी बाहर तो नहीं आई, लेकिन, सूत्रों का कहना है कि, पुलिस के आलाधिकारी को काफी अहम साक्ष्य मिले, जिसके बाद एसएचओ विकास कुमार और डायल 112 के पदाधिकारी को निलंबित किया गया।
उधर, कार्रवाई के शाम से ही इस गठजोड़ की चर्चा हर चौक चौराहों पर शुरू हो गई। लोगों का कहना है कि, जब एसएचओ के संलिप्तता की बात एसपी खुद बता रहे है तो, एसएचओ के खिलाफ एफआईआर आखिर क्यों नहीं हुई? निलंबन की सजा तक ही आखिर क्यों सीमित रह गए? लोगों का कहना है कि, ये तस्कर गैंग बहुत बड़े नेटवर्क के तहत काम करते थे। जो थाना पुलिस को मैनेज कर तस्करी के जरिए मादक पदार्थ जिला या जिला के बाहर सप्लाई करते थे। लोगों ने इस गठजोड़ की व्यापक जांच की मांग की है। उधर, सूत्र बताते है कि हाल के दिनों में ही एसएचओ अपने कुछ चुनिंदा मददगार और कलमकारो के साथ काठमांडू यात्रा पर गए थे। लोगों ने एसएचओ के राजसी ठाठ बाट पर भी सवाल खड़े किए है। काठमांडू यात्रा के भी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है। अब देखना होगा कि, इतने बड़े गठजोड़ का खुलासा होने के बाद क्या कार्रवाई सीमित ही रहती है या जांच के बाद कुछ ओर कार्रवाई होगी।



