
शारदीय नवरात्रि 2026 : माता दुर्गा का हाथी पर आगमन और मंगलवार को गमन अति शुभ, 11 अक्टूबर से होगी मां दुर्गा की आराधना
मधुबनी- 02 अक्टूबर। आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष जगतजननी मां दुर्गा का आगमन गज (हाथी) पर हो रहा है। विश्व प्रसिद्ध फेस रीडर व ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने बताया कि इस वर्ष 11 अक्टूबर, रविवार से मां दुर्गा की आराधना शुरू होगी। मां दुर्गा का गज पर आगमन, सुख-समृद्धि का मंगलकारी संदेश लेकर आया है।
पं. झा ने बताया कि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब माता का वाहन हाथी होता है, तो वह देश-समाज में प्रचुर वर्षा, कृषि उपज में वृद्धि, सुख-समृद्धि और धन-धान्य की परिपूर्णता का मंगलकारी संदेश लेकर आता है। रविवार को देवी का आगमन और मंगलवार को प्रस्थान दोनों ही श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है। उन्होंने बताया कि शारदीय नवरात्रि का महापर्व 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होगा। इसी दिन विधि-विधान से कलश स्थापना के साथ प्रथम स्वरूपा मां शैलपुत्री की उपासना की जाएगी।
कलश स्थापना का मुहूर्त—
कलश स्थापना 11 अक्टूबर, महासप्तमी 17 अक्टूबर को होगी। प्रथम प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 06:31 बजे से 11:00 बजे तक। अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): पूर्वाह्न 11:35 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक।
पूजन का क्रम—
16 अक्टूबर दोपहर 02:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक मां दुर्गा के आह्वान हेतु बिल्वाभिमंत्रण पूजन संपन्न होगा।
17 अक्टूबर महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा, डोली यात्रा, नवपत्रिका प्रवेश एवं प्रतिमाओं में प्राण-प्रतिष्ठा के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ देवी के पट खोल दिए जाएंगे। 18 अक्टूबर महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन मां महागौरी का पूजन, कन्या (कुमारिका) पूजन और मध्य रात्रि 11:00 बजे से देर रात 01:30 बजे तक तंत्र-साधना का केंद्र महानिशा पूजन होगा। 19 अक्टूबर महानवमी व्रत एवं नवरात्रि का विशेष हवन अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा।
विजयादशमी को लेकर पंचांग मतभेद —
पं. झा ने बताया कि नवरात्र हवन की पूर्णाहुति 20 अक्टूबर की सुबह 09:40 बजे की जाएगी। विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन की तिथि को लेकर पंचांगों में थोड़ा मतभेद है। मिथिला पंचांग के अनुसार उदया तिथि की मान्यता के चलते 21 अक्टूबर (बुधवार) को विजयादशमी मनाई जाएगी तथा इसी दिन कलश व मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा। वहीं, काशी पंचांग को मानने वाले स्थानों पर श्रवण नक्षत्र के संयोग के आधार पर 20 अक्टूबर को ही विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।



