
MADHUBANI:- मदरसा फैजुल गुरबा ईजरा से हिफ्ज़-ए-कुरान की शिक्षा पूर्ण करने वाले आठ छात्रों के सिर पर बांधी गई दस्तार-ए-फज़ीलत, मौके पर बोले मौलाना सोहराब, कहा- हाफिज़-ए-कुरान के लिए हदीसों में बड़ी फज़ीलत
मधुबनी- 19 अप्रैल। रहिका प्रखंड के इजरा गांव स्थित प्राचीन धार्मिक शिक्षण संस्थान मदरसा फैजुल गुरबा में भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में ‘जलसा दस्तारबंदी’ का आयोजन किया गया। इस अवसर पर 8 विद्यार्थियों ने हिफ्ज़-ए-कुरान की शिक्षा पूर्ण करने पर उनके सिर पर दस्तार-ए-फज़ीलत बांधी गई। कार्यक्रम में उलेमा, शिक्षक, सामाजिक व्यक्ति, महिलाएं, युवा और बड़ी संख्या में आम लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना मुफ्ती सोहराब कलकत्तवी ने कहा कि कुरान-ए-मजीद अल्लाह का अंतिम और सुरक्षित कलाम है। इसे याद करना बहुत बड़ी नेमत है। उन्होंने कहा कि हाफिज़-ए-कुरान के लिए हदीसों में बड़ी फज़ीलत बताई गई है। कयामत के दिन उन्हें और उनके माता-पिता को सम्मान और नूर का ताज प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हाफिज़-ए-कुरान का दर्जा केवल दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि आख़िरत में भी उसे ऊँचे मकाम मिलेंगे। कुरान उसकी शफाअत करेगा और उसे जन्नत की ओर मार्गदर्शन देगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुरान को केवल याद करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस पर अमल करना भी जरूरी है।
मौलाना ने छात्रों को सलाह दी कि कुरान को याद करने के बाद उसे लगातार दोहराना चाहिए, क्योंकि अक्सर लोग व्यस्तताओं में आकर कुरान भूल जाते हैं। उन्होंने दीन और आधुनिक शिक्षा दोनों की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों को हाफिज, आलिम और मुफ्ती के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर,वकील और अन्य पेशों में भी शिक्षित करना जरूरी है। ताकि वे समाज में बेहतर भूमिका निभा सकें। महिलाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पर्दे की अहमियत पर जोर दिया और कहा कि पर्दा इस्लामी शिक्षाओं का अहम हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज करना समाज के लिए नुकसानदेह है। इस अवसर पर मदरसा फलाहुल मुस्लिमीन के सदर शिक्षक मुफ्ती अबुज़र कासमी, क़ाज़ी इमदादुल्लाह कासमी सहित कई उलेमा ने भी संबोधित किया। मंच संचालन मौलाना जमाल अब्दुल नासिर कासमी ने किया। कार्यक्रम में विधायक आसिफ अहमद,जदयू के वरिष्ठ नेता मोहम्मद नज़र आलम,राजद नेता अब्दुल हई,पूर्व जिला पार्षद क़मरुल होदा तमनें सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। मदरसे के शिक्षक हाफिज़ इफ्तिखार की देखरेख में छात्रों ने हिफ्ज़-ए-कुरान की सफलता प्राप्त की।



