
मधुबनी का ऐतिहासिक गंगासागर तालाब में कचरा का ढेर, पानी दूषित होने की आशंका
मधुबनी – 16 अगस्त। मधुबनी शहर की पहचान और ऐतिहासिक धरोहर गंगासागर तालाब आज बदहाली का शिकार है। नियमित साफ-सफाई नहीं होने के कारण तालाब में कचरा जमा हो गया है। तालाब का पानी को दूषित होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता है। तालाब के पानी की जांच कराई जाना जरूरी हो गया है` ताकि पता चल सके कि पानी कितना खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। तालाब के घाटों पर हर तरफ पॉलीथीन, कचरा और अन्य गंदगी पड़ी हुई है। सफाई का काम नियमित रूप से नहीं हो रहा है, जिससे समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों ने बताया कि तालाब के आसपास के कई शौचालयों की गंदगी का बहाव तालाब में हो सकता है। इससे तालाब का पानी और भी ज्यादा दूषित हो सकता है। तालाब किनारे दिनभर चार पहिया वाहनों की सफाई की जाती है। वाहनों से निकलने वाली गंदगी, मोबिल और ऑयल भी तालाब में ही बह जाता है। पूर्व में शहर की शोभा गंगासागर तालाब की दुर्दशा देखकर स्थानीय लोगों में निराशा है। लोगों ने कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास दरभंगा से मांग की है कि तालाब की अविलंब सफाई कराई जाए, वाहनों और शौचालयों का गंदा पानी तालाब में जाने से रोका जाए। तालाब किनारे वाहन धुलाई पर प्रतिबंध लगाया जाए।
गंदगी से पटा गंगासागर तालाब कख सफाई की जवाबदेही न्यास की या लीजधारी की?
शहर की पहचान गंगासागर तालाब की बदहाली को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। तालाब में कचरा और गंदगी जमा होने से स्थानीय लोग चिंतित हैं। बता दें कि शहर का गंगासागर तालाब कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास, दरभंगा` की संपत्ति है। न्यास द्वारा इसे दशकों से प्रत्येक साल मछली उत्पादन के लिए लीज पर दिया जाता है, जिससे न्यास को अच्छी आमदनी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तालाब से हर साल लीज के माध्यम से आमदनी हो रही है, तो इसकी साफ-सफाई की जिम्मेदारी किसकी बनती है? लोगों के अनुसार राज दरभंगा और लीज लेने वाले व्यक्ति की ही तालाब की साफ-सफाई की जिम्मेदारी बनती है। लीज पर देने के बाद भी तालाब एक सार्वजनिक धरोहर है। इसकी साफ-सफाई और संरक्षण नहीं होने से न सिर्फ तालाब गंदा हो रहा है, बल्कि शहर की सुंदरता और पर्यावरण पर भी बुरा असर पड़ रहा है। लोगों ने मांग की है कि कामेश्वर सिंह धार्मिक न्यास, दरभंगा और संबंधित लीजधारक मिलकर तालाब की साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण की ठोस योजना बनाएं। ताकि गंगासागर तालाब को उसकी पुरानी पहचान वापस मिल सके।



