
बिहार की बेटी का राष्ट्रीय मंच पर परचम: डॉ. अनीता नारायण पुनः बनीं ICAS की नेशनल वाइस प्रेसिडेंट, ज्योतिष जगत में हर्ष की लहर
पटना- 29 सितंबर। भारतीय ज्योतिष शास्त्र की वैश्विक पहचान दिलाने वाली देश की सबसे प्रतिष्ठित संस्था इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज़ (ICAS), चेन्नई में एक बार फिर बिहार का डंका बजा है। पटना की सुप्रसिद्ध ज्योतिषाचार्या डॉ. अनीता नारायण को लगातार दूसरी बार नेशनल वाइस प्रेसिडेंट के गौरवमयी पद पर निर्वाचित किया गया है।
यह ऐतिहासिक निर्णय ICAS की 41वीं वार्षिक आम सभा (Annual General Body Meeting) में लिया गया, जो संस्था के आधिकारिक परिपत्र के अनुसार 20 सितंबर 2026 को बेंगलुरु के प्रतिष्ठित Gokulam Grand Hotel & Spa में संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य एजेंडा 2026-27 से 2028-29 के कार्यकाल के लिए नई केंद्रीय प्रबंध समिति का गठन था, जिसमें देश भर के विद्वानों ने सर्वसम्मति से डॉ. अनीता नारायण के नाम पर मुहर लगाई।
ICAS की विरासत अत्यंत गौरवशाली है। इसके संस्थापक अध्यक्ष स्व. Dr. B.V. Raman थे, जिन्हें आधुनिक भारतीय ज्योतिष का पितामह कहा जाता है। वर्तमान में इसके मानद राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री A.B. Shukla, I.A.S. (सेवानिवृत्त) हैं। ऐसे दिग्गजों की सूची में पटना की डॉ. अनीता नारायण का नाम नेशनल वाइस प्रेसिडेंट के रूप में शामिल होना बिहार के लिए किसी बड़े सम्मान से कम नहीं।
विरासत से विजन तक का सफर—
डॉ. अनीता नारायण का यह सफर केवल एक पद नहीं, बल्कि एक परंपरा का निर्वहन है। इस उपलब्धि पर भावुक होते हुए डॉ. नारायण ने कहा कि इंडियन काउंसिल ऑफ एस्ट्रोलॉजिकल साइंसेज़ (ICAS) की नेशनल वाइस प्रेसिडेंट पद पर पुनः इस पद पर चुना गया है। ज्योतिष के क्षेत्र में मेरा लंबे समय से सक्रिय योगदान रहा है। मेरे ससुर जी डॉ. आर. के. नारायण भी इस क्षेत्र से जुड़े हुए थे। उनकी विद्वता, परंपरा और ज्योतिष के प्रति समर्पण को आगे बढ़ाते हुए आज ज्योतिष के क्षेत्र में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने का प्रयास कर रही हूं। मेरे लिए यह सम्मान और जिम्मेदारी दोनों का विषय है कि मुझे पुनः राष्ट्रीय स्तर पर सेवा करने का अवसर मिला है। मैं ज्योतिष के ज्ञान, परंपरा और उसके वैज्ञानिक अध्ययन को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर कार्य करती रहूंगी।
इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए फेस रीडर व ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने कहा कि डॉ. अनीता ने ज्योतिष को अंधविश्वास से निकालकर वैज्ञानिक, तार्किक और शोधपरक बनाने में अहम भूमिका निभाई है। पटना में रहते हुए राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करना और ICAS के पाठ्यक्रम, परीक्षा और शोध कार्यों को गति देना उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।
बिहार की धरती, जो कभी आर्यभट्ट और वराहमिहिर जैसे खगोल शास्त्रियों की जननी रही है, आज उसी परंपरा को डॉ. अनीता नारायण जैसी विदुषी आगे बढ़ा रही हैं। उनके पुनर्निर्वाचन से पूरे बिहार, विशेषकर मिथिला और मगध के ज्योतिष प्रेमियों में हर्ष का माहौल है।



