
तारापुर से पहली बार विधायक बने और मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, जो एक बड़ी जिम्मेदारी: सम्राट चौधरी
मुंगेर- 26 अप्रैल। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर शनिवार को पहुंचे। यहां उनका जोरदार स्वागत किया गया। उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 133वें एपिसोड को सुना। इसके बाद जनसभा को संबोधित किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि वे तारापुर से पहली बार विधायक बने और पहली बार ही मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला, जो उनके लिए बड़ी जिम्मेदारी और चुनौती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अपने क्षेत्र की सेवा करने का अवसर मिला है और वे अधूरे कार्यों को पूरा करने के लिए आए हैं।
मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक बिहार को सजाने और विकास देने का काम किया। साथ ही उन्होंने प्रशासनिक सख्ती का संकेत देते हुए कहा कि अब मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा ब्लॉक और अंचल स्तर तक मॉनिटरिंग की जाएगी और यदि कोई पदाधिकारी एक महीने से अधिक फाइल लंबित रखता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
सम्राट चौधरी ने खुले मंच से कहा कि प्रखंड, अंचल और पुलिस थानों के कामकाज की निगरानी अब सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा की जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी बिना किसी वैध कारण के जानबूझकर किसी फाइल में एक महीने (30 दिन) से अधिक की देरी करता है या उसे दबाकर बैठ जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता के लिए किए जाने वाले काम में जानबूझकर देरी करना भ्रष्टाचार का ही एक रूप है, जिसे अब किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अतिक्रमण और अवैध निर्माण के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति को स्पष्ट करते हुए सम्राट चौधरी ने खुद का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि तारापुर में उनके अपने घर की सीढ़ी भी सरकारी जमीन पर पाई गई थी, जिसे प्रशासन द्वारा ध्वस्त किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब मुख्यमंत्री के घर पर कानून का डंडा चल सकता है, तो किसी और को बख्शने का सवाल ही नहीं उठता। अगर जमीन सरकारी है, तो वह खाली होगी ही।’
प्रशासनिक व्यवस्था को लोगों के और करीब लाने के लिए मुख्यमंत्री ने ‘सहयोग कार्यक्रम’ शुरू करने की घोषणा की। इस पहल के तहत हर महीने पंचायत स्तर पर दो-दिवसीय शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में जिला और प्रखंड स्तर के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे, ताकि पेंशन, राशन कार्ड, भूमि म्यूटेशन (नामांतरण) और पुलिस से जुड़े मामलों में ग्रामीणों की समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित किया जा सके।
अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र के विकास को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने 12.49 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिनका उद्देश्य ढोल पहाड़ी को एक इको-टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित करना है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र न केवल प्राकृतिक सुंदरता का केंद्र है, बल्कि पर्यटन के माध्यम से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा।



