विश्व

पश्चिम एशिया तनाव के कारण कच्चे तेल में उबाल, 119 डॉलर के करीब पहुंचा ब्रेंट क्रूड

नई दिल्ली- 20 मार्च। पश्चिम एशिया में जारी जंग से दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने लगा है। इस लड़ाई के दौरान इजरायल द्वारा ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला करने और इसके जवाब में ईरान द्वारा कतर, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत आसमान पर पहुंच गई है। तेल और गैस ठिकानों पर हुए हमले की वजह से गुरुवार को बाजार खुलते ही दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई।

ब्रेंट क्रूड ने आज 110.86 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की और थोड़ी ही देर में कुलांचे भरते हुए 118.73 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर तक पहुंच गया। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड ने आज 99.76 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची अफरा तफरी के कारण थोड़ी देर में ही डब्ल्यूटीआई क्रूड उछल कर 100.02 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि दिन के कारोबार में कच्चे तेल की कीमत में गिरावट का रुख बनता हुआ नजर आया। भारतीय समय के अनुसार शाम 7 बजे ब्रेंट क्रूड 4.75 प्रतिशत की तेजी के साथ 112.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह डब्ल्यूटीआई क्रूड 97.47 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया था।

इजरायल द्वारा ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर हमला करने के बाद ईरान ने जवाबी हमले में कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट पर मिसाइल अटैक किया था। इसके साथ ही संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत के ऊर्जा ठिकानों को भी निशाना बनाया था। आज ईरान ने एक बार फिर सऊदी अरब की यानबू रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया। ऊर्जा ठिकानों पर ये हमले ऐसे समय पर हो रहे हैं, जब अमेरिका और इजरायल तथा ईरान के बीच जारी जंग की वजह से पहले ही पूरी दुनिया में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की किल्लत हो गई है।

जंग की शुरुआत होने के बाद ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति को पहले ही ठप कर चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते होने वाली तेल की सप्लाई ठप हो जाने के कारण दुनिया के कई देशों में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की कमी हो गई है। ऐसे हालात में तेल और गैस के ठिकानों पर हो रहे परस्पर हमले ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट को और बढ़ा दिया है।

इजरायल के हमले के जवाब में ईरान पश्चिम एशिया में अमेरिका के ठिकाने वाले सभी देशों को लगातार अपना निशाना बना रहा है। इसी क्रम में उसने पहले कतर और संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया और अब सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू शहर में स्थित रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक किया। ये रिफाइनरी सऊदी अरामको और अमेरिकी कंपनी एक्सॉन मोबिल का संयुक्त उद्यम है। इस रिफाइनरी पर ड्रोन अटैक होने के बाद वहां आग लग गई, जिसके बाद रिफाइनरी के संचालन को फिलहाल रोक दिया गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आवाजाही ठप हो जाने के बाद से ही सऊदी अरब का यानबू शहर तेल निर्यात का एक अहम रूट बन गया है। सऊदी अरब यहीं से अपना तेल पूरी दुनिया में भेज रहा है। ऐसी स्थिति में अब जबकि ईरान ने लाल सागर के तट पर स्थित यानबू शहर की रिफाइनरी को भी अपना निशाना बना दिया है, तब यहां होने वाले सऊदी अरब के तेल निर्यात के पूरी तरह से ठप होने की आशंका भी जताई जा रही है। ईरान के हमले की आशंका की वजह से संयुक्त अरब अमीरात का फुजैरा पोर्ट भी पूरी तरह से बंद है। ऐसी स्थिति में मिडिल ईस्ट के देशों से होने वाली कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति के पूरी तरह से ठप हो जाने की आशंका बन गई है।

टीएनवी फाइनेंशियल सर्विसेज के सीईओ तारकेश्वर नाथ वैष्णव का कहना है कि इजरायल द्वारा ईरान के तेल और गैस ठिकानों पर हमला करने के बाद ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिका के सहयोगी देशों पर हमला शुरू कर दिया है। पिछले 24 घंटे के दौरान ईरान ने मिडिल ईस्ट के देशों पर कई हमले किए हैं। इनमें कतर के रास लफान गैस प्लांट को ईरान के मिसाइल अटैक के कारण काफी नुकसान हुआ है। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात में हबशान गैस फैसिलिटी और बॉब ऑयल रीजन के ऊपर ईरानी ड्रोन इंटरसेप्ट होने के बाद पूरी तरह से कामकाज ठप हो गया है। इसके अलावा कुवैत की दो बड़ी रिफाइनरियों मीना अब्दुल्ला और मीना अल अहमदी पर भी ईरान ने ड्रोन अटैक किया, जिससे वहां आग लग गई।

पश्चिम एशिया के कई देशों के ऊर्जा ठिकानों पर ईरान के हमले की वजह से दुनिया भर में ऊर्जा संकट का खतरा बन गया है। दुनिया के कुल तेल उत्पादन का लगभग एक तिहाई इन देशों से ही आता है। जंग की शुरुआत होने के बाद से अब शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इन देशों से नया कंसाइनमेंट लेना भी बंद कर दिया है। इसकी वजह से पूरी दुनिया में तेल और गैस की सप्लाई पर नकारात्मक असर पड़ा है।

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