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 चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के लिए 32 देशों से 184 फिल्मों का आवेदन, चुनिंदा फिल्मों का होगा प्रदर्शन

औरैया- 01 सितम्बर। चंबल अंचल की नई छवि गढ़ने को बेताब घाटी का पहला फिल्म समारोह ‘चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल’ धीरे-धीरे समाज में जगह बनाने के साथ अब देश-विदेश के फिल्मकारों के बीच खासा लोकप्रिय होता जा रहा है। यही वजह है कि धौलपुर में होने जा रहे चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के सातवें संस्करण के लिए इस बार भारत, ताइवान, अमेरिका, ब्रिटेन, वियतनाम, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया, ईरान, स्पेन, पुर्तगाल, सेरबिया, तुर्की सहित 32 देशों से विभिन्न श्रेणियों में कुल 184 फिल्में प्राप्त हुईं। इनमें फीचर फिल्म, शार्ट फिल्म, डाक्युमेंट्री, वेब सीरिज और मोबाइल फिल्में शामिल हैं।

चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के आयोजक डॉ. शाह आलम राना ने हिन्दुस्थान समाचार प्रतिनिधि को बताया कि ज्यूरी सदस्यों ने सभी फिल्मों के गहन देख-परीक्षण के बाद 103 फिल्मों का ऑफिशियली चयन किया है। इनमें से कुछ बेहतरीन और चुनिंदा फिल्में दो दिवसीय फिल्म समारोह में प्रदर्शित की जाएंगी।

इस वर्ष की ज्यूरी में पांच दिग्गज हस्तियां शामिल हैं। जिनमें डॉ.अनुषा श्रीनिवासन अय्यर जो कि सरोकारी पत्रकार के रूप में मशहूर वैश्विक पुरस्कार विजेता लेखिका-निर्देशिका हैं। बाल श्रम, आशा और खुशी पर आधारित उनकी फिल्म ‘सारे सपने अपने हैं’ ने 128 से अधिक पुरस्कार जीते और 150 से अधिक राष्ट्रीय और अंतर-राष्ट्रीय फिल्म समारोहों में प्रदर्शित की गई।

ज्यूरी में दूसरा नाम अभिनेत्री और मॉडल मान्या पाठक का है जो जीटीवी के रियलिटी शो ‘दिल्ली डार्लिंग्स’, ‘एसिड आक्रमण’ में अभिनय के साथ संगीत वीडियो ‘तौबा मेरी तौबा’, ‘ये रास्ते’ में काम कर चुकी लोकप्रिय अभिनेत्री हैं। ज्यूरी में तीसरा नाम अल्बानिया निवासी फिल्म निर्देशक, लेखक एवं व्याख्याता वाल्मिर टर्टिनी हैं। उनकी बनाई फिल्में दुनिया भर के सैकड़ों फिल्म समारोहों का हिस्सा रही हैं। उन्हें 19 अंतर—राष्ट्रीय और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। वह तिराना विश्वविद्यालय में फिल्म और जनसंचार पढ़ाने के साथ कोसोवो, अल्बानिया और मैसेडोनिया के समाचार पत्रों में टीवी और फिल्मों के लिए निरंततर लिखते रहें हैं। उनकी चार पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।

ज्यूरी में चौथा नाम अजरबैजान निवासी जलालुद्दीन गसीमोव हैं। वह 6 ऐतिहासिक उपन्यासों के लेखक और ‘शोलेर्स आर्काइव’, ‘एग्जीक्यूशन डे’, ‘द फर्स्ट सक्सेस ऑफ नोबेल ब्रदर्स’ और ‘स्टालिन्स डार्क पास्ट’ जैसी फिल्मों के पुरस्कार विजेता लेखक, निर्माता और निर्देशक हैं। उनकी पहली फिल्म ‘शोलेर्स आर्काइव’ जो एक सच्ची कहानी पर आधारित है। यह न केवल अंतर-राष्ट्रीय समारोहों में बहुत सफल रही, बल्कि इसने सबसे अधिक पुरस्कार और उपलब्धियां हासिल कीं, जो अज़रबैजान के किसी भी फिल्म को अंतर-राष्ट्रीय मंच पर नसीब नहीं हुई। उनकी फिल्म ‘शॉलर्स आर्काइव’ को अमेरिकी कांग्रेसमान जिमी गोमेज़ द्वारा प्रमाण पत्र प्राप्त हुआ है।

ज्यूरी में पांचवा नाम लेखक और निर्देशक प्रोफेसर मोहन दास हैं जो कि चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के ज्यूरी चैयरमैन और डायरेक्टर भी हैं। वे विश्व के कई दर्जन फिल्म समारोहों से जुड़े हैं। भारतीय सिनेमा, कला, संस्कृति और विज्ञान को बढ़ावा देने के लिए वे कई वैश्विक मंचों पर प्रतिभाशाली फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए अवसर प्रदान का अथक प्रयास कर रहे हैं।

चंबल परिवार के बैनर तले आगामी 9-10 सितम्बर को धौलपुर के नगर परिषद सभागार में भव्यता के साथ होने जा रहे ‘चंबल इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल-7’ का पोस्टर जिला कलेक्टर अनिल कुमार अग्रवाल ने बीते दिनों जारी किया था। आयोजक फिल्म समारोह को ऐतिहासिक बनाने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं।

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Author: lakshyatak

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