
देश के विकास में श्रमिकों की भूमिका अहम, संविधान में मिले अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष जारी: पूर्व उद्योग मंत्री
मधुबनी- 30 अप्रैल। मई दिवस की पूर्व संध्या पर पूर्व उद्योग मंत्री व पूर्व विधायक समीर कुमार महासेठ ने कहा की श्रमिकों के अधिकार और उनकी एकजुटता के लिए संकल्प लेना होगा। देश के विकास में मजदूरों की अहम भूमिका रही है। संविधान में गरीब-मजदूरों को मिले अधिकार की रक्षा के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। किसान,मजदूरों को अपने हक के लिए सजग रहते हुए उनकी एकजुटता को खत्म करने वालों से सतर्क रहना होगा। मजदूरों के लिए सरकार द्वारा लागू किए गए लाभकारी योजनाओं के लाभ के लिए संवैधानिक तरीके से संघर्ष जारी रखना होगा। उन्होंने कहा कि महंगाई, बेराजगारी व भ्रष्टाचार के विरूद्ध लडाई लड़ना होगा। श्रमिकों ने अधिकार की लड़ाई को लेकर निरंतर संघर्ष किया जा रहा है। विभागीय उदासीनता के कारण श्रमिकों को सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ रहा है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि सरकार राज्य के नगर निकाय सहित कई विभागों में संविदा, आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी व्यवस्था लागू कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। इसके तहत कार्य कराने वालों का शोषण कर उनके अधिकार का हनन कर रही है। उन्होंने कहा कि बिहार के विभिन्न नगर निकायों में कार्यरत संविदा दैनिक वेतनभोगी और एनजीओ कर्मियों की समस्याएं लगातार गंभीर होती जा रही है। कर्मियों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार द्वारा अब तक कोई ठोस एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे कर्मियों में भारी असंतोष आक्रोश व्याप्त है।
उन्होंने बताया कि मधुबनी जिला सहित राज्य के विभिन्न निकायों में करीब 17 वर्षों से लगभग 35 हजार दैनिक सफाई कर्मी शहरों, नालों की सफाई सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का निर्वहन कर रहे हैं। जिसमें करीब 80 प्रतिशत कर्मी दलित, महादलित वर्ग से आते हैं, जिनकी सामाजिक, आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय है। बावजूद इसके उनकी सेवाओं का नियमित करने के दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है। सरकार द्वारा चतुर्थवर्गीय पदों को समाप्त कर दिया गया, लेकिन वर्षों से कार्यरत इन कर्मियों के भविष्य के संबंध में कोई नीति निर्धारित नहीं की गई। जिससे आज भी अस्थायी स्थिति में कार्य करने को विवश हैं। दैनिक वेतनभोगी कर्मियों को हटाये जाने, आउटसोर्सिंग एजेंसियों के माध्यम से कार्य करने हेतु बाध्य किये जाने की शिकायत बढ़ गई है।कई निकायों में बिना स्वीकृति, बिना पारदर्शी प्रक्रिया के मानवबल की नियुक्ति भी की जा रही है, जिसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है।



