
25 सितंबर को मनाया जाएगा अनंत पूजा का पर्व, 14 गांठों वाले अनंत सूत्र का है विशेष महत्व: पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 24 सितंबर। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाने वाला अनंत पूजा का पर्व इस वर्ष 25 सितंबर को मनाया जाएगा। यह जानकारी पं. ऋषिनाथ झा ने दी। पं. झा ने बताया कि पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात 11 बजकर 18 मिनट से शुरू होकर 25 सितंबर की रात 11 बजकर 06 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार व्रत-पूजन 25 सितंबर को ही शास्त्रसम्मत होगा। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 06:28 बजे से रात 11:06 बजे तक रहेगा।
उन्होंने कहा कि इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा की जाती है, जिनका कोई आदि-अंत नहीं है। इस दिन 14 गांठ वाला अनंत सूत्र बनाकर भगवान विष्णु को अर्पित कर अपनी भुजा पर बांधा जाता है। मान्यता है कि ये 14 गांठें 14 लोकों की प्रतीक हैं। इसे धारण करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है, संकट दूर होते हैं।
पं. झा ने बताया कि महाभारत काल में जब पांडव जुए में सब कुछ हारकर वन-वन भटक रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को इस व्रत की महिमा बताई थी। श्रीकृष्ण ने कहा – हे युधिष्ठिर, तुम अनंत भगवान विष्णु का व्रत करो, इससे तुम्हारा खोया हुआ राजपाट वापस मिल जाएगा। पांडवों ने विधि-विधान से व्रत किया और 14 वर्ष बाद उन्हें हस्तिनापुर वापस मिला। तभी से भादो शुक्ल चतुर्दशी को अनंत व्रत की परंपरा शुरू हुई।
पं. झा ने बताया कि 14 गांठ का संबंध 14 लोकों – तल, अतल, वितल, सुतल, तलातल, रसातल, पाताल, भू, भुवः, स्वः, महः, जनः, तपः, सत्य से है। अनंत सूत्र बांधने का अर्थ है इन 14 लोकों के स्वामी भगवान विष्णु को अपने बंधन में बांधना।


