
MADHUBANI:- अंचल कार्यालय और नगर निगम को शहर के निर्लजी पोखर की चिंता नहीं!
"लक्ष्य तक की 'पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर" अभियान
— नगर निगम क्षेत्र की तालाबों, सरोवर, कुआं की दशा को लेकर ‘लक्ष्य तक’ ने ‘पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत प्रथम चरण में नगर निगम क्षेत्र की एक तालाब की प्रतिदिन पड़ताल होगी। उम्मीद है कि जल संरक्षण के दिशा में यह अभियान शासन-प्रशासन और आम लोगों के बीच की सार्थक कड़ी साबित होगी। ‘पारंपरिक जलस्त्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान के छठवें दिन प्रस्तुत है नगर निगम क्षेत्र के निर्लजी पोखर की पड़ताल। अभियान को लेकर निगम क्षेत्र की तालाब संबंधी जानकारी हमें वाटसएप पर उपलब्ध कराई जा सकती है। जिसे ‘लक्ष्य तक’ पर जगह दी जा सकती है
मधुबनी- 27 अप्रैल। नगर निगम क्षेत्र के कोतवाली चौक दुर्गा स्थान के सामने भौआड़ा स्थित अतिक्रमण के चपेट में निर्लजी पोखर की ओर ना तो अंचल कार्यलय की नजर पहुंच रही है और ना ही नगर निगम प्रशासन द्वारा अतिक्रमण खाली कराने की कार्रवाई की जा रही है।
मालुम हो कि रहिका अंचल की सैरात सूची में शामिल खेसरा 4423 रकवा 1.77 डीसमल वाली निर्लजी पोखर भिंडा की बात तो दूर पोखर के अंदर तक अतिक्रमण कर मकान बना लिया गया है। निर्लजी तालाब की जमीन पर अतिक्रमण रोकने के लिए निगम और अंचल प्रशासन की उदासीनता से अतिक्रमण का सिलसिला आज भी जारी है। बतादें कि निगम क्षेत्र की तालाबों की दशा देखने से जल ही जीवन का नारा खोखला साबित हो रहा है। समाज के लिए तालाबों बड़ी अहमियत रही है। लेकिन सरकारी तालाबों की देखभाल और संरक्षण के जिम्मेवार अंचल कार्यालय और नगर निगम प्रशासन की उदासीनता किसी से छीपी नहीं है। निर्लजी तालाब गंदगी व जलकुंभी से अटा-पटा रहता है। जंगल-झाड़ की साफ-सफाई सिर्फ छठ पूजा पर की जाती है। लेकिन तालाबों का अतिक्रमण खाली नहीं कराई जाती है।
गौरतलब है कि प्रशासन की लापरवाही से तालाब अपनी पहचान खोता जा रहा है। हाल ही में जिलाधिकारी द्वारा नगर निगम क्षेत्र की सार्वजनिक तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश को शहर के लोगों ने स्वागत करते हुए इस दिशा में शीध्र ही कार्रवाई की उम्मीद कर रहें है।



