
MADHUBANI: हरियाली की इच्छाशक्ति, दोस्तों का संकल्प, शहर को ईको पार्क बनाने की पहल
मधुबनी- 20 मई। शहर में पिछले दिनों 2 पुराने दोस्त मिले, गर्मी की वजह से झुंझला कर एक मित्र सोनू त्रिपाठी ने कहा कि हरियाली होती तो इतनी गर्मी नहीं होती, बस फिर क्या था दूसरे दोस्त अधिवक्ता प्रकाश मणि झा ने संकल्प लिया कि 1997 बैच के सभी सदस्य मिलकर पौधारोपण का अलख जगाया जाए। बात बैच के अन्य दोस्तो तक पहुंची। सभी ने मिलकर पौधारोपण कार्य की शुरुआत करने के साथ इसे अभियान बनाने का निर्णय लिया गया कि पौधारोपण कार्य को अभियान का स्वरूप दिया जाए। शहर के प्रत्येक मोहल्ले में स्थिल सार्वजनिक खाली जमीन पर पौधा लगाया जाए। लगाए जाने वाले पौधा की देखभाल के लिए स्थानीय लोगों को प्रेरित किया जाए। इस अभियान से बच्चे और किशोर को भी जोड़ा जाए। इसकी शुरुआत 31 साल पुराने 31 दोस्तों की आपसी आर्थिक सहयोग से शुरु की गई। इन दोस्तों में अधिवक्ता प्रकाश मणि झा,नरेंद्र झा,उत्पल कर्मयोगी देवताजी, मोना, कुणाल राज श्रीवास्तव, रमन सिन्हा, राजकुमार यादव, शंकर झा, गुंजेश रंजन, एमके झा मुन्ना, रौशन झा, शरदेंदु कुमार, अभिषेक कुमार, सिद्धू कुमार, अरविंद लाल दास, विजय मलिक, देवेश रंजन, गोपाल रेणु, रितेश झा, पंकज झा रवीन, अमृताश, सौरभ झा, पंकज श्रीवास्तव, मनीष दोस्त, संजय झा आपकी, गौतम झा सुप्रीम कोर्ट, सोनू त्रिपाठी, देवाशीष, निशांत साह, असीम आनंद, राहुल झा सहित अन्य शामिल है।
पौधारोपण अभियान 2026 की शुरुआत 17 मई को शहर के टाउन क्लब मैदान से की गई। 5 साल की तृषा, 7 साल के जयेश, 11 साल के सारस्वत और 4 साल की प्राप्ति से पौधारोपण कराई गई। अधिवक्ता प्रकाश मणि झा ने कहा कि पेड़-पौधों से प्राप्त ऑक्सीजन पर हमारा जीवन निर्भर है। आक्सीजन के लिए हरियाली का होना जरूरी होता है। इसके लिए पौधारोपण और उसके संरक्षण के लिए प्रयास किया जाना अनिवार्य हो गया है। जलवायु परिर्वतन के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए हरे-भरे वृक्षों को काटने की बजाय उसके संरक्षण का संकल्प लेना होगा। अधिवक्ता ने कहा कि पौधारोपण और उसके संरक्षण के लिए इच्छाशक्ति हो तो हरियाली का सपना साकार होना आसान हो जाता है। पर्व-त्योहार, विवाह, बर्थ-डे के अलावा अन्य अवसरों पर पौधा वितरण की परम्परा को विकसित करते हुए लोगों में फलदार पौधों का वितरण कर उसकी देखभाल का संकल्प दिलाया जाएगा। पौधा देखभाल के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा। पौधों से लगे फूलों का खिलना मन को बड़ा सकून देता था। बचपन से पौधों के प्रति जगी प्यार उसकी की देखभाल की प्रेरणा जागृत होती चली गई।



