
MADHUBANI: शिव नारायण यादव की 25 साल से प्रतिदिन 50 किमी साइकिलिंग की मिसाल
मधुबनी- 11 मई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए देश में पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने का आह्वान किया है। पीएम ने ईंधन बचाने के लिए निजी वाहनों का उपयोग कम करने की बात कहीं है। प्रधानमंत्री के इस आह्वान से इतर मधुबनी जिले के कलुआही प्रखंड के मलमल उत्तर पंचायत के राढ गांव के 79 वर्षीय शिव नारायण यादव साल 2001 से प्रतिदिन करीब 50 किमी साइकिल की सवारी करते है। शिव नारायण यादव गांव से साइकिल चलाकर 22 किमी की दूरी तय कर मधुबनी आते है। पार्टी, सामाजिक व पारिवारिक कार्य के लिए मधुबनी में 5 से 6 किमी साइकिल चलाकर फिर 22 किमी साइकिल चलाकर गांव जाते है। साल 2001 से 2026 तक करीब 25 साल से साइकिल की सवारी में शिव नारायण यादव अब तक तीन साइकिल खरीदी है। उन्होंने बताया कि साइकिल की सवारी से शारीरिक फिटनेस बनी है। बाइक के लिए पेट्रोल खर्च की बचत हो रही है। 79 साल के होने के बाद भी
पूरी तरह स्वस्थ है। हालांकि उम्र के लिहाज से ब्लडप्रेशर की शिकायत बनी रहती है। उन्होंने बताया कि साल 2000 तक जनशक्ति प्रकाशन से जुड़े रहने से पटना में रहते थे। साल 2001 से गांव में रहने लगे, तब से साइकिल की सवारी को चुना है। साल 1973 से भाकपा से जुड़े है।
एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 30 से 45 मिनट साइकिल चलानी चाहिए
शहर के दंत चिकित्सक डा. उमेश श्रीवास्तव ने बताया कि एक स्वस्थ व्यक्ति को प्रतिदिन 30 से 45 मिनट या प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट साइकिल चलानी चाहिए। उन्होंने बताया कि नियमित रूप से साइकिल चलाना शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन है। यह वजन घटाने, हृदय स्वास्थ्य सुधारने, मांसपेशियों को मजबूत करने और तनाव कम करने में मदद करता है। यह एक बेहतर व्यायाम है। जोड़ों पर कम दबाव डालता है। स्ट्रोक, मधुमेह के जोखिम को कम करता है। साइकिल चलाने से अधिक कैलोरी बर्न होती है, जिससे वजन घटाने और मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। हृदय, फेफड़ों और रक्त वाहिकाओं को स्वस्थ रखता है, जिससे दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा कम होता है। पैडलिंग से पैर, कूल्हे और जांघों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। गठिया के मरीजों के लिए भी फायदेमंद है। साइकिलिंग तनाव, चिंता और अवसाद को कम करती है, जिससे मूड बेहतर होता है। यह शरीर में रक्त संचार बढ़ाता है। जिससे एनर्जी बनी रहती है। रात में बेहतर नींद आती है। यह प्रदूषण-मुक्त परिवहन का एक सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल साधन है।



