बिहार

इको फ्रेंडली पेपरमेशी खिलौनों का दुनियाभर में डिमांड, कलाकृतियों को आकर्षक बनाता मधुबनी कला की छटा

“भारत दुनियाभर में हस्तशिल्प उत्पादों में इको फ्रेंडली पेपरमेशी, सिक्की खिलौना, मिट्टी कला, मिथिला पेंटिंग्स के अग्रणी व आपूर्तिकर्ताओं में से एक है। खिलौना व अन्य कलाकृतियां देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विदेशी आय का एक प्रमुख माध्यम बनता जा रहा है। हस्तशिल्प विभाग शिल्पियों के लिए कल्याणकारी योजनाएं चलाया जा रहे हैं। विपणन, औजार, उपकरण वितरण, कच्चे माल की आपूर्ति, प्रशिक्षण एवं शिल्पियों के जरूरत अनुसार सुविधाएं दी जाती है।”

बीके झा, सहायक निदेशक हस्तशिल्प विभाग

मधुबनी- 29 अप्रैल। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक की जगह इको फ्रेंडली पेपरमेशी कला में तैयार खिलौनों की दुनियाभर में मांग बढ़ी है।पेपरमेशी खिलौनों में ग्रामीण रंग-रूप और इस पर मिथिला पेंटिंग्स की छटा बच्चे काफी पसंद करते है। मिथिला पेंटिंग्स बिखेरेती पेपरमेशी खिलौना और अन्य कलाकृतियों का सालाना 50 लाख से अधिक का कारोबार का अनुमान है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम पेपरमेशी खिलौनों की आनलाइन मांग बनी रहती है। खिलौनों, कलाकृतियों की कीमत का भुगतान भी आनलाइन होता है। मांग के अनुरूप खिलोनों की आपूर्ति कूरियर के जरिए की जा रही है। पेपरमेशी खिलौने की कीमत 100 से 2000 मूल्य तक होती है।

देश के महानगरों में पेपरमेशी खिलौनों की लगाई जाती प्रदर्शनी—

ईको फ्रेंडली होने से देश के महानगरों व विदेशों में पेपरमेशी खिलौनों और अन्य कलाकृतियां, राखी, देवी-देवताओं की मूर्तियां, मोर, तोता-मेना, मछली, हाथी, खरगोश, स्टार, ढोलक, फूल, पशु-पक्षी, उपहार आइटम की मांग सर्वाधिक है। पेपरमेशी के अलावा सिक्की कला, मिट्टी कला में खिलौना की मांग काफी बढ़ी है। देश के महानगरों में पेपरमेशी खिलौनों की प्रदर्शनी लगाई जाती है। खिलौना, सजावटी वस्तुएं, उपहार आइटम बाजार की मांग के अनुरूप तैयार किए जाते है।पेपरमेशी खिलौना, कलाकृतियां के प्रसिद्ध कलाकार स्टेट अवार्डी मधुबनी शहर के आदर्शनगर कालोनी निवासी कामिनी कौशल ने बताया कि देशभर में लोग पेपरमेशी खिलौना व अन्य कलाकृतियों की डिमांड करते है। उनके वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यू डब्ल्यू कामिनी क्राफ्ट डाटकम व वाट्सएप के जरिए सालोभर आर्डर आते हैं। अधीरा देवी, गंभीरा देवी, रामरती देवी, शीला देवी, आशा देवी, सुधीरा देवी सहित जिले के तीन दर्जन कलाकार सालोभर पेपरमेशी खिलौना व कलाकृतियां तैयार करने में जुटी रहती हैं।

रद्दी कागज-कार्टन की लुदगी से तैयार होता पेपरमेशी खिलौना—

रद्दी कागज व कार्टन को पानी में भिगोकर लुगदी बनाई जाती है।लुगदी में 40 प्रतिशत मिट्टी व मुल्तानी मिट्टी के अलावा नीम के पेड़ की छाल-पत्ती की पानी का मिश्रण कर इसे गूथ लिया जाता है। फिर इससे खिलौना व अन्य कलाकृतियां तैयार किए जाते हैं। तैयार कलाकृतियों को धूप व हवा में सूखाने के बाद उसे चाकू, टकूआ से संवारा जाता है। फिर उसे मनमोहक मिथिला पेटिंग्स की छटा उकेरी जाती है।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on Instagram Follow
Follow on X-twitter Follow
Follow on Pinterest Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button