
चैती छठ व्रतियों के बीच पौधा वितरण की पहल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक : आदित्य नारायण
मधुबनी- 17 मार्च। चैती छठ पूजा पर व्रतियों को निशुल्क फल-फूल का पौथा प्रदान की जाएगी। पौधा व्रतियों के बीच नहाय खाय से पूर्व दिए जाएंगे। यह पौधा भविष्य में पेड बनकर फल-फूल मिलने के साथ हरियाली को बढ़ावा मिलेगा। यह पहल पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बनेगा। उक्त बातें संस्कार संस्कृति संरक्षण समिति के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आदित्य नारायण गुप्ता अजीत ने कहीं। उन्होंने कहा कि आशा ही नहीं विश्वास है कि व्रतियों को पौधा मिलने से व्रतियों व इनके स्वजन इन पौधों को बड़े शिद्दत से सींचेगे।
पौधा से प्राप्त फुल पूजा-अर्चना के लिए उपयुक्त होंगे। यह पौधा साल दर साल छठ पूजा की याद दिलाएंगी। हरेक साल चैती छठ पूजा पर व्रतियों के बीच पौधा वितरण का क्रम जारी रखा जाएगा। है। यह अभियान पर्यावरण संरक्षण के लिए कारगर साबित होगा। व्रती आवासीय परिसर, खेतों में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण को बढावा देंगी। पौधारोपण और इसके संरक्षण के प्रति जागरूकता आई है। उन्होंने कहा कि एक पौधा सालों बाद वृक्ष बनाकर मानव जीवन को आक्सीजन के साथ छाया प्रदान करता है। जितने अधिक पेड़ होंगें उसी मात्रा में हमें ऑक्सीजन मिलेगी। पेड़ों की संख्या घटने से ऑक्सीजन की मात्रा कम होगी। इससे मानव जीवन खतरे में पड़ सकता है। कोरोना के समय सबसे अधिक ऑक्सीजन की अहमियत सामने आई थी। पौधारोपण और इसके संरक्षण की सोच विकसित करने के साथ भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करने वाले पेड़ों में बरगद की संख्या बढ़ाने और उसकी रक्षा का संकल्प लेना होगा। एक-एक बरगद, पीपल का पौधा लगाने से स्वस्थ्य रहने का खजाना मिल सकता है। धार्मिक महत्व वाले बरगद का पेड़ औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है। सदियों से बरगद के जड़, तना, पत्तियां, फल और छाल का उपयोग आयुर्वेदिक दवा में किया जाता रहा है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-माइक्रोबियल सहित अन्य तत्व पाए जाते हैं।



