एजुकेशन

बड़ी सफलता हासिल करनी है,तो अकाउंटेबल होना एकमात्र मन्त्र है : उज्जवल पाटनी

पटना-13 दिसंबर। देश के जितने भी बड़े बिजनेस हाउस हैं, वे सही कैंडिडेट का चुनाव करते समय आठ बातों का ध्यान रखते हैं,पहला,आपके रेज्यूम में दूसरों से अलग क्या है,दूसरा,आपने अपने जीवन में किसी भी काम या व्यापार से लेकर कोई भी तजुर्बा हासिल किया है या नहीं,तीसरा,यदि कंपनी आपको रखती है, तो क्या आप सही रूप में प्रशिक्षित होने की क्षमता रखते हैं, चौथा, आप किसी काम को बीच में छोड़ देते हैं या उसे अंजाम तक पहुँचाने का सार्थक प्रयास करते हैं,पांचवा,आपके अन्दर प्रोफेशनलिज्म के साथ साथ अध्यात्मिक व भावनात्मक विचार का क्या प्रतिशत है, और छठा, आपका डिजिटल ज्ञान कितना है और किसी कंपनी के लिए यह कितना लाभदायक साबित हो सकता है, सातवाँ,क्या आप दिए गए जिम्मेदारी का निर्वाह उस कंपनी के मालिक के तौर पर कर सकते हैं। तथा अंतिम,क्या आप एकाउंटेबल हैं। पटना के रबिन्द्र भवन में आरकेड बिजनेस कॉलेज द्वारा आयोजित देश के प्रसिद्द मोटिवेटर व लेखक डॉ. उज्जवल पाटनी छात्रों के बीच रूबरू थे। उन्होंने ‘सफलता के अनमोल मन्त्र’ सेमीनार में छात्रों से करियर व जीवन में सफलता के रहस्य को साझा किया। उन्होंने कहा कि हम अक्सर अकाउंटेबल होने से बचते हैं,ताकि हमें किसी बात का जवाब नहीं देना पड़े। जवाब देने के लिए जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। जिम्मेदारी लेने के लिए काम करके कुछ को जिम्मेदार साबित करना होगा।

यदि हम भीड़ का हिस्सा नहीं होना चाहते और एक बड़ी सफलता अपने नाम करना चाहते हैं,तो हमें अकाउंटेबल तो होना पड़ेगा। जब किसी कंपनी में कोई प्रोडक्शन होता है,तो एक जैसा प्रोडक्ट निकलता है। तथा जब उस कंपनी का कोई प्रोडक्ट ठीक नहीं निकलता, तो कंपनी उसे डिफेक्ट प्रोडक्ट के रूप में घोषित करती है। एक कक्षा में एक ही शिक्षक, एक ही सिलेबस,एक ही कॉलेज, एक ही भाषा, एक ही किताब, एक ही तरीका अपनाया जाता है, परन्तु कोई छात्र किसी कंपनी के सीईओ बन जाता है और कुछ जिन्दगी भर धक्के खाते रहते हैं,तो फिर ऐसा क्या है, जो सफल छात्र करता है? दरअसल वो छात्र वो सारा काम करता है, जो सफल लोग किया करते हैं। अब सफलता में उम्र की कोई बंदिश नहीं रही। वह समय चला गया जब लोग 50-60 की आयु में सफल होते थे। आज 25 साल के लड़का एक कंपनी का सीईओ बन जाता है,अतः आज का समय युवाओं के लिए अवसरों के लिहाज से स्वर्णिम युग है। ओला, ट्विटर, जोमेटो, बैजुज, ओयो जैसे कंपनी को एक साधारण लड़के ने शुरू की और आज परिणाम सबके सामने है. उन्होंने कहा कि हमारा ध्यान कई बार आसान रणनीति की ओर जाता है, परन्तु हमें सही रणनीति का चुनाव करना है. सेमीनार के प्रारंभ में आरकेड बिजनेस कॉलेज के निदेशक व करियर काउंसलर आशीष आदर्श ने अंगवस्त्र देकर डॉ पाटनी का स्वागत किया।

डॉ. पाटनी के 10 गूढ़ मन्त्र—

अकाउंटेबल बनने के लिए मन से तैयार रहो ;
अपनी असफलता का जश्न मनाओ. इससे अगले प्रयास के लिए उर्जा मिलेगी।

वैसे लोगों से मित्रता करो, जिसे देखकर लगता हो कि ये जरुर आगे चलकर कुछ करेगा।

सुनने की आदत डालो,क्या पता कोई बात जीवन बदलने वाली सुनाई पड़ जाये।

अब तक जो हुआ, उसको छोड़ो. आगे देखो.
कॉलेज के अंक केवल सर्टिफिकेट का हिस्सा हैं और इसका प्रैक्टिकल प्रोफेशनल लाइफ में ज्यादा महत्व नहीं.
खुद में कोई एक स्किल डेवलप करो।

किसी भी अवसर में संभावनाओं को खोजने की आदत डालो.
सोशल मीडिया का समय कम करो, यह आपको अपने ध्येय से भटकाने वाला सबसे बड़ा शत्रु है।

रोजाना दिन भर की दिनचर्या पर रात को 10 लाइन लिखने की आदत डालो, यह आपके जीवन में चमत्कार कर देगा.

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