
झंझारपुर एडीजे-थानाध्यक्ष मामले में CID की जांच प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट में 10 जनवरी को प्रस्तुत करने का आदेश
पटना-08 दिसंबर। झंझारपुर के एडीजे अविनाश कुमार के साथ मधुबनी जिला के घोघरडीहा थाने के एसएचओ और वहीं के एक दारोगा द्वारा किये गए मारपीट एवं बदसलूकी मामले की सुनवाई बुधवार को हाईकोर्ट ने करते हुए सीआईडी को कहा कि वह 10 जनवरी तक जांच की प्रगति रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें।
जस्टिस राजन गुप्ता व जस्टिस मोहित कुमार शाह की खंडपीठ झंझारपुर जिला के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एन्ड सेशंस जज अविनाश कुमार के साथ की गई मारपीट के संबंध में जिला जज द्वारा भेजी गई रिपोर्ट जो रिट याचिका में तब्दील की गई थी। उसी याचिका पर बुधवार को सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। कोर्ट ने सीआईडी को कहा कि इस मामले की जांच में जो भी तथ्य सामने आ रहा है उसकी पूरी जानकारी एक शपथ पत्र के माध्यम से 10 जनवरी तक कोर्ट को उपलब्ध करावें।
कोर्ट ने इस मामले में खंडपीठ को सहयोग करने के लिए पिछली तिथि पर वरीय अधिवक्ता मृगांक मौली को एमिकस क्यूरी अधिवक्ता नियुक्त करते हुए इस मामले की जांच का जिम्मा सी आई डी को सौंपने का आदेश पिछली सुनवाई पर दिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा था कि इस मामले का अनुसंधान एसपी रैंक के पुलिस अधिकारी ही करेंगे उसके नीचे के पुलिस अधिकारी से इसकी जांच नही कराई जायेगी। कोर्ट ने कहा था कि इस मामले का पर्यवेक्षण (सुपरविजन ) एडीजी रैंक के अधिकारी करेंगे।
कोर्ट ने मधुबनी एसपी के कार्यशैली पर भी नाराजगी जताते हुए सरकार को स्पष्ट तौर पर कहा था कि इस कांड के अनुसंधान में मधुबनी पुलिस का किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं होना चहिए। कोर्ट ने सरकार को कहा था कि इस मामले में की गई करवाई की रिपोर्ट सील बन्द लिफाफे में अगली सुनवाई 8 दिसंबर को अदालत में पेश करने का निर्देश देते हुए कहा था कि फिलहाल डीजीपी को इस मामले में कोर्ट में आने की जरूरत नहीं है,परंतु अगर जरूरत पड़ी,तो उन्हें बुलाया जाएगा।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक रूप से तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि पावर मिलने का मतलब यह नहीं होता है कि किसी के साथ कुछ भी कर दिया जाय।सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता ललित किशोर ने मौखिक रूप से कहा कि राज्य में अराजकता जैसी कोई स्थिति नहीं है।
इस घटना के संबंध में जिला जज द्वारा भेजे गए रिपोर्ट के मुताबिक 18 नवंबर को दिन के तकरीबन 2 बजे दिन में एस एच ओ गोपाल कृष्ण एवं घोघरडीहा के पुलिस सब इंस्पेक्टर अभिमन्यु कुमार शर्माऔर उसी थाने के एक दरोगा ने जज अविनाश कुमार के चैम्बर में जबरन घुसकर/उन्हें भद्दी भद्दी गालियां देनी शुरू कर दी। जब जज साहब ने गाली देने से मना किया, तो दोनों पुलिस अधिकारियों ने जज के साथ दुर्व्यवहार एवं हाथापाई किया । इतना ही नहीं,दोनों पुलिस अधिकारियों ने उनपर हमला किया और मारपीट किया था. पुलिस अधिकारियों ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर निकालकर एडीजे पर आक्रमण करना चाहा लेकिन हल्ला सुनकर कोर्ट के ही कुछ कर्मियों और अधिवक्ताओं के पहुंचने की वजह से जज साहब की जान बच गई। इस मामले को लेकर उसी दिन जिला जज ने हाईकोर्ट को अपना रिपोर्ट भेजा जिस पर उसी दिन रात में साढ़े सात बजे एक विशेष पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए डीजीपी समेत कई अधिकारियों को अगली सुनवाई पर रिपोर्ट के साथ कोर्ट में तलब किया था।कोर्ट ने 18 नवंबर को सुनवाई करते हुए कहा था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि यह प्रकरण न्यायपालिका की स्वतंत्रता को खतरे में डालता है। अब इस मामले पर 10 जनवरी को फिर सुनवाई की जाएगी।



