बिहार

बिहार में शिक्षकों के शराब ढूंढने के आदेश पर शिक्षक संघ ने जताया विरोध

पटना- 29 जनवरी। बिहार सरकार के शराब ढूंढ़ने वाले एक आदेश ने शिक्षकों में आक्रोश बढ़ा दिया है। शराबबंदी कानून का पालन कराने के लिए शराबियों को पकड़वाने के आदेश से आक्रोशित शिक्षकों ने राज्य में बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि अगर आदेश को वापस नहीं लिया जाता है तो राज्य में हर स्तर से विरोध किया जाएगा।

बिहार राज्य प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप कुमार पप्पू ने कहा है कि राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालय पर 30 जनवरी रविवार को अपर मुख्य सचिव शिक्षा विभाग के आदेश पत्र की प्रति जलाकर विरोध करेंगे। सभी संघीय पदाधिकारी और प्रतिनिधि से अपील की गई है कि शिक्षकों को विभाग द्वारा लगातार गैर शैक्षणिक कार्यों में लगाकर जान और सेवा को जोखिम में डाला जाता है।

टीईटी-एसटीईटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ के प्रदेश प्रवक्ता अश्विनी पांडेय ने कहा कि बिहार सरकार शिक्षा विभाग का अजीबो-गरीब फरमान है। गुरुजी अब बिहार में शराब की तस्करी पर रोक लगाने के लिए पुलिस की तरह कैसे काम कर सकते हैं।

शराब से जुड़े इस पत्र पर राज्य के शिक्षा मंत्री विजय चौधरी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि इस आदेश को लेकर विपक्ष द्वारा भ्रम फैलाया जा रहा है। प्रदेश की राजग सरकार ने तो पहले ही सभी नागरिकों से अपील की थी,अब विभाग ने अपने सम्मानित शिक्षकों से अपील की है। यह तो विभाग ने फिक्स नहीं किया है कि सप्ताह में शराब से जुड़ी इतनी सूचना देनी है। बस कहा गया है कि ऐसी को जानकारी मिले तो सूचित करें। सरकार के तरफ से सभी नागरिकों को ये बातें कहा जा रही है कि कहीं कोई शराब पी रहा हो या शराब का स्टॉक किया जा रहा है तो गुप्त रूप से सूचना दीजिए। ऐसे में शिक्षकों से भी कहा गया तो इसमें गलत क्या है?

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य (एमएलसी) प्रेमचंद मिश्रा ने कहा है कि शिक्षा विभाग के नए आदेश से शिक्षा व्यवस्था का प्रतिकूल असर पड़ेगा। यह तुगलकी फरमान है। शिक्षक से कौन-कौन काम कराएंगे नीतीश कुमार? जो काम पुलिस नहीं कर पाई वह काम सरकार शिक्षकों को दे रही है।

राजद के प्रदेश प्रवक्ता चित्तरंजन गगन ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी है। आधे से ज्यादा शिक्षक के पद रिक्त हैं। इससे कई स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बाधित रहती है। अब सरकार शिक्षकों को शराब की बोतल खोजने में लगवा रही है। सरकार की जिद्द की वजह से पहले से ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था और भी चौपट हो जाएगी। भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने कहा कि सरकार अब दारू खोजने में शिक्षकों को लगा रही है। यह शिक्षा विरोधी कदम है। सरकार चाहती ही है कि सरकारी स्कूल जहां गरीबों के बच्चे पढ़ते हैं।

बिहार में शिक्षकों के प्रमुख काम—

-पोषाहार का वितरण

-मिड डे मील का काम

-बच्चों का नामांकन करना

-बच्चों के बारे में पूरी जानकारी रखना

-क्वारैंटाइन सेंटर पर ड्यूटी

-कोरोना की दवा बांटने में ड्यूटी

-पशुगणना

-जनगणना

-मास्क चेकिंग

-मानव श्रृंखला

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