
MADHUBANI:- सौराठ सभा की वैवाहिक पंजी परंपरा भारतीय संस्कृति का धरोहर: मोद नारायण झा
मधुबनी- 27 अप्रैल। मैथिल विकास प्रतिष्ठान के उपाध्यक्ष मोद नारायण झा ने कहा कि मैथिल ब्राह्मणों का विश्व प्रसिद्ध वैवाहिक निर्धारण स्थल सौराठ सभा की शुरुआत इस साल 2 जुलाई से होगा। 12 जुलाई तक चलने वाली सौराठ सभावास और पंजी व्यवस्था को मिथिला तक ही नहीं देश में भी इस परंपरा को विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह के लिए पंजी प्रबंधन विवाह को सौहार्दपूर्ण, समर्पण और सात जन्मों तक साथ निभाने की मान्यता मिली है।
विवाह व परिवार की मजबूती के लिए प्राचीन काल से पंजी परंपरा का बड़ा महत्व रखता था। विवाह जन्म-जन्म का संबंध माना जाता था। पंजी व्यवस्था की अनदेखी से विवाह संबंध साल दो साल में टूटने लगा है। उन्होंने कहा कि सरकार विवाह का रजिस्ट्रेशन पर जोर देती है। आधुनिक दौर में भी रजिस्ट्रेशन और पंजीयन का कितना महत्व है इसकी चिंता हमारे मनीषियों ने हजारों वर्ष पहले ही की।
प्राचीन काल में भी विवाह का पंजीयन उन्नत परंपरा रही है। पंजी प्रबंधन का वैज्ञानिक महत्व है। विवाह में आडंबर से बचने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिथिला की धरोहर सौराठ सभा को खोई गरिमा का पुर्णस्थापन की ओर युवाओं, विद्वानों, साहित्यिकरों को पंजी परंपरा के प्रति जागरूक करेगा। सौराठ की पंजी व्यवस्था के तहत तार के पत्ता पर सिद्धांत लिखाया जाता था। सौराठ से घर पहुंचने पर सिद्धांत को इष्टदेव, देवी को समर्पित करते थे।
उन्होंने कहा कि भगवान राम,सीता की स्वयंवर से मिथिला में विवाह के लिए पंजी व्यवस्था विवाह को मजबूती दी है।सौराठ सभा की पंजी प्रबंधन समगौत्र से विवाह को बचाने के साथ-साथ बगैर दहेज विवाह को मान्यता दिया है। सामाजिक दृष्टिकोण से पंजा प्रथा को आगे बढ़ाना विवाह संबंध को मजबूती प्रदान करता है।



