
गोरखपुर में CDS बिपिन रावत ने विद्यार्थियों से कहा था- अगर सूरज की तरह बनना चाहते हो तो उसकी तरह जलना सीखो
गोरखपुर-08 दिसम्बर। तमिलनाडु के कुन्नूर में बुधवार को हुए हेलीकॉप्टर हादसे में देश के सैन्य बलों के पहले प्रमुख सीडीएस जनरल बिपिन रावत, उनकी पत्नी मधुलिका रावत समेत 13 लोगों की मौत हो गई है। सीडीएस के निधन से पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। उत्तर प्रदेश के जनपद गोरखपुर में भी ऐसा ही माहौल है। सीडीएस के साथ बिताए उन पलों को याद करके लोगों के आंखों में आसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सीडीएस बिपिन रावत वर्ष 2020 में तीन दिसम्बर को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में गोरखपुर आए थे।
कार्यक्रम से एक दिन पहले पहुंचे सीडीए बिपिन रावत ने गोरखनाथ मंदिर पहुंचकर गोरक्षनाथ का आशीर्वाद लिया था। यहां पर सीडीएस के साथ बिताये उन पलों को याद करके मंदिर व्यवस्थापक द्वारिका तिवारी और मिडिया प्रभारी विनय गौतम की आंखें भर आई। उन्होंने कहा कि यह हादसा बेहद दुखद है और पूरे देश के लिए अपूर्णीय क्षति है।
एक दिन पहले आये थे सीडीएस—
महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद समारोह के कार्यक्रम के एक दिन पहले सीडीएस बिपिन रावत तीन दिसम्बर को शहर आ गए थे। जबकि कार्यक्रम चार दिसम्बर होना था। गोरखपुर एयरपोर्ट आने के बाद वह सबसे पहले गुरु गोरक्षनाथ का आशीर्वाद लेने गोरखनाथ मंदिर पहुंचे थे।
मुख्यमंत्री योगी ने की थी अगुवानी—
जब वह मंदिर पहुंचे तो पहले से मौजूद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरखनाथ मंदिर के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने उनकी अगुवानी की थी। इसके बाद सीडीएस ने मंदिर में गुरु गोरक्षनाथ की पूजा कर उनका आशीर्वाद लिया था। जनरल को मुख्यमंत्री ने पूरे मंदिर का भ्रमण कराया और यहां के महत्व व इतिहास के बारे भी जानकारी दी थी। मंदिर भ्रमण के बाद यहां कुछ विशेष लोगों से मुलाकात की और रात में मंदिर में ही भोजन किया था। रात्रि विश्राम के लिए आर्मी गेस्ट हाउस चले गए थे।
जब शिक्षक की भूमिका में आए थे नजर—
अगले दिन चार दिसम्बर को सीडीएस बिपिन रावत महाराणा प्रताप इंटर कॉलेज के प्रांगण में पहुंचे। गॉर्ड ऑफ आनर लिया और मंच पर चलें गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ,उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा साथ में थे। बहुत देर तक वह छात्र-छात्राओं द्वारा निकले जा रहे झांकियो को देखते रहे। जब वह समारोह को सम्बोधित कर रहे थे तब वह तीनों सेना के प्रमुख नहीं बल्कि एक शिक्षक के रूप मे नजर आ रहे थे।
उपस्थित विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कठोर परिश्रम का कोई विकल्प नहीं होता। चाहे कितनी भी असफलताएं मिले निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। आपकी हार आपको और मजबूत करती है। अपनी कमियों को दूर करते हुए सतत प्रयास से सफलता को पाया जा सकता है। आप जितना संघर्ष करेंगे आप उतने मजबूत होंगे। सूरज खुद तपकर हम सभी को रोशनी देता है। अगर सूरज की तरह बनना चाहते हो तो सूरज की तरह जलना सीखो।



