
मुजफ्फरपुर के DM पर दस हजार रुपये का अर्थदंड
पटना- 16 दिसंबर। कोर्ट की ओर से पूछे गए सवाल का जबाब नहीं दे पाने पर नाराज हाई कोर्ट ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी पर 10 हज़ार रुपये का अर्थदंड लगाया है। जस्टिस पी बी बजन्थरी की एकलपीठ ने राम सोभित पासवान की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को उक्त निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि अर्थ दण्ड की राशि जिलाधिकारी अपने पॉकेट से बिहार स्टेट लीगल सर्विसेज़ ऑथोरिटी पटना में जमा करेंगे। कोर्ट को बताया गया कि जिलाधिकारी ने 5 जनवरी 2021 को मुजफ्फरपुर में पदभार ग्रहण किया है। याचिकाकर्ता ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी द्वारा पारित आदेश को निरस्त करने को लेकर यह याचिका दायर की है। कोर्ट को बताया गया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति दलपति के पद पर की गई थी। उसके बाद याचिकाकर्ता को पंचायत सेवक के पद पर नियुक्त किया गया था। इस बीच पारस राय नाम के एक व्यक्ति ने याचिकाकर्ता की नियुक्ति को पटना हाई कोर्ट में चुनोती दी थी ।उसने अपने याचिका में कहा था कि याचिकाकर्ता की दलपति के पद पर नियुक्ति गैरकानूनी है। इसलिए पंचायत सेवक के पद पर बाद में की गई नियुक्ति भी गैरकानूनी है।रिट याचिका में आरोप लगाया गया था कि दलपति के पद पर याचिकाकर्ता की नियुक्ति संबंधित पंचायत के कार्यकारी कमेटी द्वारा नहीं कि गई थी।
इस मामले को लेकर मुज़फ़्फ़रपुर के जिलाधिकारी गुरुवार को कोर्ट के समक्ष उपस्थित थे। कोर्ट ने जब उनसे इस संबंध में जानकारी मांगी तो उन्होंने कोर्ट को कहा की उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं थी। इस मामले में सरकार का जबाब बन कर वर्ष 2018 से ही जिलाधिकारी के कार्यालय में लंबित था और कोर्ट में दाखिल नहीं किया जा सका था। इसपर कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जिलाधिकारी का साहस देखिए कि वे यह कह रहे हैं कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं थी। कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें इस मामले की जानकारी मिली है। इसके बाद इनके रहते हुए इनकी ओर से 9 दिसंबर, 2021 को जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्हें अभी भी जवाबी हलफनामा की कॉपी नहीं मिली है।


