
उत्तर बिहार में बाढ़ की उन्नत पूर्वानुमान प्रणाली के लिए पूर्व उद्योग मंत्री समीर महासेठ को संगीतायन फाउंडेशन का प्रस्ताव, IIT पटना से अध्ययन की मांग
मधुबनी- 21 अक्टूबर। उत्तर बिहार में हर साल आने वाली भीषण बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव बिहार सरकार के पूर्व उद्योग मंत्री समीर महासेठ को सौंपा गया है। यह प्रस्ताव सामाजिक एवं सांस्कृतिक चेतना के संवाहक संगीतायन फाउंडेशन के अध्यक्ष अवनीन्द्र ठाकुर ने भेजा है। फाउंडेशन ने अपने पत्र में कहा है कि उत्तर बिहार हर वर्ष भीषण और बार-बार आने वाली बाढ़ से प्रभावित होता है, जिससे जनहानि, आजीविका का संकट, कृषि एवं आधारभूत संरचना को भारी नुकसान और व्यापक जन-पीड़ा होती है। यह प्रस्ताव 25 जुलाई को पटना में आयोजित ‘मिथिला, गरीबी, कारण और निवारण’ विषयक सेमिनार के अनुसरण और उसमें दिए गए सुझावों के अनुपालन हेतु प्रस्तुत किया गया है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए ‘बिहार सेन नेटवर्क’ के यूट्यूब चैनल को देखने का भी अनुरोध किया गया है।
प्रस्ताव का मुख्य बिंदु 48 घंटे पहले मिले सटीक चेतावनी
फाउंडेशन ने प्रस्ताव रखा है कि बिहार सरकार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT पटना) से अनुरोध करे कि वह उत्तर बिहार के लिए एक उन्नत बाढ़ पूर्वानुमान एवं प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली विकसित करने हेतु तकनीकी और वैज्ञानिक अध्ययन कर व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार करे।
इस प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य होगा कि कम से कम 48 घंटे पहले विश्वसनीय बाढ़ पूर्वानुमान उपलब्ध कराया जा सके, ताकि सरकार, जिला प्रशासन, स्थानीय निकाय और समुदाय समय रहते रोकथाम एवं निकासी की तैयारी कर सकें। अधिक सटीक पूर्वानुमान के लिए अध्ययन में 6 प्रमुख बिंदुओं को शामिल करने का सुझाव दिया गया है। जिसमें उपग्रह आधारित अवलोकन एवं रिमोट सेंसिंग डेटा, नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से वर्षा एवं बर्फ पिघलने का डेटा, प्रमुख नदियों एवं सहायक नदियों का वास्तविक समय जलस्तर एवं प्रवाह डेटा, ऐतिहासिक बाढ़, वर्षा, नदी प्रवाह एवं स्थलाकृतिक डेटा, डिजिटल ऊँचाई एवं भू-भाग का मानचित्रण, और जिला, प्रखंड एवं गाँव स्तर पर बाढ़ जोखिम मानचित्रण।
गाँव-स्तर तक चेतावनी जारी होगी—
पत्र में उल्लेख है कि इस प्रणाली से गाँव एवं प्रखंड स्तर पर बाढ़ चेतावनी जारी की जा सकेगी, जिसमें संभावित समय, सीमा एवं तीव्रता का उल्लेख होगा। इससे प्रशासन को निकासी, राहत वितरण, अस्थायी आश्रय, चिकित्सा सहायता, पशुधन सुरक्षा एवं अन्य आपात उपायों की अग्रिम योजना बनाने में मदद मिलेगी।
फाउंडेशन ने सुझाव दिया है कि IIT पटना को इस विषय पर व्यवहार्यता एवं तकनीकी आकलन करने हेतु कहा जाए। इसमें संबंधित सरकारी विभागों, केंद्रीय जल आयोग, भारत मौसम विज्ञान विभाग, उपग्रह एवं रिमोट सेंसिंग एजेंसियों तथा नेपाल के उपयुक्त प्राधिकारणों से परामर्श लिया जाए।



