
जीतिया व्रत: 3 अक्टूबर को माताएं रखेंगी संतान की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत, 2 अक्टूबर से नहाय-खाय शुरू
मधुबनी- 01 अक्टूबर। संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए रखा जाने वाला महापर्व जीतिया (जीवित्पुत्रिका) व्रत इस साल 3 अक्टूबर, शनिवार को मनाया जाएगा। विश्व प्रसिद्ध फेस रीडर व ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने बताया कि मिथिला में जीतिया सबसे कठिन निर्जला व्रतों में से एक माना जाता है।
तीन दिन का पर्व—
2 अक्टूबर, शुक्रवार नहाय-खाय: इस दिन महिलाएं स्नान कर सात्विक भोजन ग्रहण करेंगी। परंपरा के अनुसार मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग और कद्दू-भात खाने की परंपरा है। 3 अक्टूबर, शनिवार – मुख्य निर्जला व्रत: अष्टमी तिथि 3 अक्टूबर सुबह 7:59 बजे से शुरू होकर 4 अक्टूबर सुबह 5:51 बजे तक रहेगी। इसी दिन माताएं पूरे दिन बिना जल ग्रहण किए व्रत रखेंगी।
4 अक्टूबर, रविवार – पारण: सुबह 7:28 बजे के बाद सूर्योदय के साथ व्रत का पारण किया जाएगा।
पूजा का शुभ मुहूर्त—
व्रत का संकल्प अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:46 से 12:34 बजे तक लेना शुभ होगा। मुख्य पूजा प्रदोष काल में शाम 6:05 बजे से रात 8:29 बजे तक की जाएगी। इसी दौरान जीमूतवाहन भगवान की कथा और कुशा से बनी प्रतिमा, चील-सियारिन की पूजा का विधान है।
जीतिया को लेकर बाजारों में मड़ुआ रोटी, नोनी साग और कद्दू-चूड़ा की मांग तेज
जीतिया व्रत को लेकर ग्रामीण बाजारों से लेकर शहरी मंडियों तक खरीदारी तेज हो गई है। व्रत में नहाय-खाय के लिए प्रसाद के रूप में उपयोग होने वाले मड़ुआ की रोटी, नोनी का साग, कद्दू और चूड़ा की मांग अचानक बढ़ गई है। बाजारों में महिलाएं सुबह से ही इनकी खरीदारी में जुटी हैं।
दुकानदारों का कहना है कि इस बार मड़ुआ आटा 60 रुपये किलो, नोनी का साग 30-40 रुपये प्रति किलो, कद्दू 40-50 रुपये प्रति पीस तक बिक रहा है। इसके साथ ही जितिया व्रत की पूजा सामग्री, नई टोकरी, कुश और चील-सियारिन की मिट्टी की मूर्तियों की भी खूब बिक्री हो रही है।



