
भारत सरकार के स्वच्छता अभियान को बदनाम कर रहा मधुबनी स्टेशन प्रशासन
मधुबनी- 24 अप्रैल। भारतीय रेलवे एक तरफ कायाकल्प योजना के तहत स्टेशनों को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। मधुबनी रेलवे स्टेशन, जो अपनी मिथिला पेंटिंग के लिए विश्व विख्यात है, आज अपनी बदहाली और गंदगी के कारण चर्चा में है। यहाँ यात्रियों के लिए बनाए गए शौचालयों की स्थिति इतनी भयावह है कि वहां कदम रखना भी दूभर हो गया है। स्टेशन पर बने शौचालयों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि महीनों से यहाँ सफाई का काम नहीं हुआ है।
शौचालय के अंदर न केवल गंदगी है, बल्कि वे खाली बोतलों और कचरे से पटे पड़े हैं। दुर्गंध इतनी तीव्र है कि यात्री शौचालय के पास से गुजरने में भी कतरा रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि यहाँ न तो नियमित सफाई होती है और न ही इसकी देखरेख के लिए कोई कर्मचारी तैनात दिखता है। शौचालय की इस बद से बदतर स्थिति को देखकर यात्रियों ने गहरा दुख और रेलवे प्रशासन के खिलाफ कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है।
यात्रियों ने बताया कि यदि किसी को इमरजेंसी में शौचालय का उपयोग करना हो, तो उसके पास स्टेशन पर कोई विकल्प नहीं बचता। हार मानकर यात्रियों को ट्रेन के आने का इंतजार करना पड़ता है ताकि वे ट्रेन के भीतर बने शौचालयों का उपयोग कर सकें। एक तरफ भारत सरकार महात्मा गांधी के स्वच्छता के सपने को साकार करने के लिए स्वच्छ भारत अभियान चला रही है, जिसका मूल मंत्र है स्वच्छता ही स्वास्थ्य की कुंजी है।
परंतु मधुबनी रेलवे स्टेशन पर यह नारा पूरी तरह से विफल नजर आ रहा है। यात्रियों ने सवाल उठाया कि जब स्टेशन परिसर ही स्वच्छ नहीं रहेगा, तो यात्रियों का स्वास्थ्य कैसे सुरक्षित रहेगा? सरकार के नियमों और निर्देशों का यहाँ खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। यात्रियों ने रेल प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़ा किया है। कहा कि समस्तीपुर मंडल के डीआरएम महीने में निरीक्षण के लिए आते तो हैं, लेकिन उनका दौरा महज एक औपचारिकता बनकर रह गया है। जब डीआरएम के आने की सूचना होती है, तो आनन-फानन में केवल दिखाने के लिए सफाई की जाती है। उनके जाते ही स्थिति फिर वैसी ही हो जाती है।
हकीकत में कोई स्थायी सुधार नहीं हो रहा है। हालांकि, निरीक्षण के दौरान अधिकारियों द्वारा निर्देश दिए जाते हैं कि यात्रियों को किसी प्रकार की समस्या न हो, लेकिन धरातल पर इन निर्देशों का पालन शून्य है। वही करोड़ों के बजट और विकास के दावों के बीच मधुबनी स्टेशन की यह तस्वीर चिंताजनक है। यात्रियों ने रेल मंत्रालय और उच्चाधिकारियों से कहा कि केवल कागजों पर विकास न दिखाकर धरातल पर स्वच्छता सुनिश्चित की जाए और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए।



