
मुख्यमंत्री को छोड़ स्टेनो पर FIR क्यों? राजद नेता ब्रह्मानंद यादव ने उठाए सवाल
मधुबनी- 27 सितंबर। जमुई की नाबालिग पीड़िता और उसके परिवार की तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के आशुलिपिक सागर प्रसाद के खिलाफ सचिवालय थाने में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
इस मामले को लेकर राजद नेता ब्रह्मानंद यादव ने सरकार पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने और सिर्फ मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारी को आरोपी बनाए जाने पर सवाल उठता है। पुलिस के अनुसार मामला नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने से जुड़ा है। 25 सितंबर को सामने आए मामले में सचिवालय थाने में POCSO की धारा 23, भारतीय न्याय संहिता की धारा 73 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मुख्यमंत्री कार्यालय में तैनात सागर प्रसाद की तस्वीर पोस्ट किए जाने में भूमिका सामने आई, जिसके आधार पर उन्हें आरोपी बनाया गया है।
प्राथमिकी में पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले अन्य अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। ब्रह्मानंद यादव ने कहा कि पीड़िता 25 सितंबर को अपने परिवार के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की थी। इसके बाद मुलाकात की तस्वीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से पोस्ट की गई। तस्वीर अन्य सोशल मीडिया मंचों पर भी प्रसारित हुई, जिसके बाद पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने को लेकर विवाद शुरू हुआ।
राजद नेता ने सवाल उठाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय मुख्यमंत्री कार्यालय के स्टेनोग्राफर को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि यदि तस्वीर मुख्यमंत्री के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से सामने आई, तो इसकी जिम्मेदारी और भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।



