
विजयादशमी पर नीलकंठ दर्शन से पूरी होती हैं मनोकामनाएं, पापों से मिलती है मुक्ति: पं. ऋषिनाथ झा
मधुबनी- 20 अक्टूबर। विजयादशमी के दिन नीलकंठ पक्षी के दर्शन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन मात्र से साल भर के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस पर विस्तार से जानकारी देते हुए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि विजयादशमी पर नीलकंठ दर्शन का शास्त्रों में विशेष महत्व बताया गया है।
पं. झा ने कहा कि नीलकंठ भगवान शिव का स्वरूप है। समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विषपान किया तो उनका कंठ नीला हो गया, तभी से उन्हें नीलकंठ कहा गया। दशहरे के दिन नीलकंठ का दर्शन भगवान शिव के दर्शन के समान माना जाता है।”
रामायण काल से जुड़ी है मान्यता—
उन्होंने बताया कि लंका पर चढ़ाई से पहले जब भगवान श्रीराम को रावण वध को लेकर चिंता हुई, तब उसी समय नीलकंठ पक्षी ने उन्हें दर्शन देकर विजय का संकेत दिया था। तभी से दशहरे के दिन नीलकंठ दर्शन को विजय और सफलता का प्रतीक माना जाने लगा। कहा जाता है कि दशहरे पर यदि नीलकंठ दिख जाए तो समझो आपका आने वाला साल शुभ और विजय से भरा रहेगा।
दर्शन का शुभ मुहूर्त और महत्व—
पं. ऋषिनाथ झा के अनुसार दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन से जाने-अनजाने में हुए सभी पापों का नाश होता है। इस दिन नीलकंठ को देखने से घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और रुके हुए कार्य पूर्ण होते हैं। जिन लोगों के जीवन में शत्रु बाधा या कोर्ट-कचहरी के मामले हैं, उन्हें दशहरे पर नीलकंठ के दर्शन अवश्य करने चाहिए। उन्होंने बताया कि विजयादशमी के दिन सुबह स्नान कर भगवान राम और शिव का स्मरण करते हुए खुले आकाश में नीलकंठ के दर्शन करने चाहिए। यदि दर्शन हो जाए तो मन में अपनी मनोकामना कहनी चाहिए, वह अवश्य पूरी होती है।



