
बाइक पार्ट्स बाजार में बड़ा खेल-बिल नहीं, गारंटी नहीं, MADHUBANI में ग्राहक को नकली पार्ट्स थमा रहे दुकानदार, GST को लग रहा करोड़ों का चूना
मधुबनी- 20 अक्टूबर। जिले में बाइक रिपेयरिंग और पार्ट्स की दुकानों पर खुलेआम नियमों की अनदेखी हो रही है। अधिकांश दुकानदार पार्ट्स बेचने के बाद खरीदारों को पक्का बिल नहीं देते। ऊपर से सस्ता और नकली पार्ट्स असली के दाम पर बेच दिया जाता है। इसका सीधा असर दो तरफ हो रहा है। एक तरफ सरकार को हर महीने लाखों के जीएसटी की चोरी हो रही है, तो दूसरी तरफ अनजान ग्राहक ठगी का शिकार हो रहे हैं।
कैसे हो रहा है खेल?
ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के खरीदारों को बाइक के छोटे-छोटे पार्ट्स जैसे ब्रेक शू, चेन स्प्रोकेट, एयर फिल्टर, क्लच प्लेट, स्पार्क प्लग, ब्रेक ऑयल सील, इंडिकेटर, बेयरिंग की असली-नकली में पहचान नहीं होती। दुकानदार इसी का फायदा उठाते हैं। 100-150 रुपये वाला लोकल पार्ट्स 400-500 में असली बताकर बेच दिया जाता है। बिल न होने के कारण ग्राहक न तो कंपनी में शिकायत कर पाता है, न ही दुकानदार पर दबाव बना पाता है। एक बाइक मैकेनिक ने बताया कि कंपनी का पार्ट्स महंगा आता है, नकली सस्ता। बिल नहीं देना है तो नकली पर मुनाफा तीन गुना है। ग्राहक 10-15 दिन में फिर वापस आएगा, फिर नया पार्ट्स लगेगा।
सुरक्षा पर भी खतरा—
नकली ब्रेक शू, क्लच वायर और टायर ट्यूब जैसी चीजें सीधे जान से जुड़ी हैं। कम कीमत वाले नकली पार्ट्स जल्दी घिस जाते हैं, जिससे चलते बाइक में ब्रेक फेल, चेन टूटने और एक्सीडेंट का खतरा बढ़ जाता है। फिर भी बाजार में बिना किसी रोक-टोक के इनकी बिक्री धड़ल्ले से हो रही है।
GST की बड़ी चोरी—
बिल नहीं देने से पूरा कारोबार कैश में हो रहा है। जीएसटी विभाग के एक जानकार के अनुसार, अगर एक छोटी दुकान रोज 15 से 20 हजार का पार्ट्स बेचती है और साल भर बिल नहीं देती, तो अकेले एक दुकान से 2 से 3 लाख रुपये की जीएसटी चोरी होती है। जिले में सैकड़ों दुकानें हैं, तो आंकड़ा करोड़ों में पहुंच जाता है।
ग्राहक क्या करें?
1. पार्ट्स खरीदते समय हमेशा पक्का बिल लें, जिस पर GSTIN नंबर और पार्ट्स का नाम लिखा हो।
2. पैकेट पर कंपनी का होलोग्राम, MRP और पार्ट नंबर जरूर देखें।
3. बिल न देने वाले दुकानदार की शिकायत GST हेल्पलाइन या जिला परिवहन/उपभोक्ता फोरम में करें।
प्रशासन से मांग—
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और वाणिज्य कर विभाग से मांग की है कि बाइक पार्ट्स बाजार में औचक छापेमारी की जाए, बिल बुक चेक की जाए और नकली पार्ट्स बेचने वालों पर जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई हो। साथ ही जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को असली-नकली की पहचान बताई जाए।



