भारत

स्वतंत्र मंत्रालय ने उपेक्षित रहे सहकारिता आंदोलन को दी नई पहचान: गृह मंत्री

नई दिल्ली- 06 जुलाई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में अब देश में सहकारिता के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि पांच वर्ष पहले बने स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय ने उपेक्षित रहे सहकारिता आंदोलन को नई पहचान दी है और यह स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रालय राज्यों के अधिकारों में दखल देने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें मजबूत करने और सहकारी संस्थाओं को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम एवं प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए कार्य कर रहा है।

सहकारिता मंत्रालय के पांचवें स्थापना दिवस पर यहां आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि आज से ठीक पांच वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वतंत्र सहकारिता मंत्रालय का गठन कर देश के 30 करोड़ से अधिक सहकारिता से जुड़े लोगों और 8.5 लाख से अधिक सहकारी संस्थाओं की 75 वर्षों पुरानी मांग पूरी की थी। उन्होंने कहा कि इससे सहकारिता आंदोलन को नया जीवन मिला और उसे आगे की एक सदी के लिए मजबूत आधार प्राप्त हुआ।

उन्होंने कहा कि मंत्रालय के गठन के समय यह आशंका जताई गई थी कि सहकारिता राज्य का विषय होने के कारण केंद्र राज्यों के अधिकारों में हस्तक्षेप करेगा, लेकिन पिछले पांच वर्षों में किसी भी राज्य ने ऐसी कोई शिकायत नहीं की। उन्होंने कहा कि सहकारिता मंत्रालय का उद्देश्य राज्यों के कार्यों में सहयोग देना, नीतियां बनाना और सहकारी संस्थाओं को सशक्त बनाना है।

शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में सहकारी व्यवस्था को आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता को केवल प्राथमिक स्तर तक सीमित रखने के बजाय कृषि ऋण, डेयरी, उर्वरक वितरण और ग्रामीण सेवाओं को राष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत तंत्र के रूप में विकसित किया गया है तथा द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों तक भी इसका विस्तार किया गया है।

उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं के लिए रैंकिंग फ्रेमवर्क शुरू किया गया है, जिसके तहत विभिन्न क्षेत्रों की उत्कृष्ट सहकारी समितियों की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा। साथ ही त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय के माध्यम से बैंकिंग, डेयरी, विपणन, कृषि, उर्वरक तथा सहकारिता के अन्य क्षेत्रों के प्रशिक्षित पेशेवर तैयार किए जाएंगे, जिससे सहकारी संस्थाओं में प्रोफेशनल प्रबंधन, पारदर्शिता और कार्यकुशलता बढ़ेगी तथा नियुक्तियों में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा।

कार्यक्रम के दौरान शाह ने कई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इनमें 135 अन्न भंडारण गोदामों का हस्तांतरण, 85 गोदामों का लोकार्पण और 47 गोदामों का शिलान्यास शामिल है। इसके अलावा अमूल और एनसीसीएफ द्वारा ‘सहकार वन’ का भूमि पूजन तथा उत्तर प्रदेश के बाराबंकी और महाराष्ट्र के जलगांव में बीबीएसएसएल की टिश्यू कल्चर सुविधाओं का भूमि पूजन भी किया गया।

इस अवसर पर एनसीडी 3.0 और जियो-टैग मोबाइल एप्लिकेशन, एनडीडीबी के दूध आपूर्ति समीक्षा डैशबोर्ड पोर्टल, कोऑपरेटिव इनपुट्स एंड सर्विसेज डिलीवरी मल्टी-स्टेट लिमिटेड के अंतर्गत डेयरी पशुओं की उत्पादकता बढ़ाने संबंधी पहल, कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स ऑर्गनाइजेशन मल्टी-स्टेट लिमिटेड तथा गोमय सहकारी समिति मल्टी-स्टेट लिमिटेड का भी शुभारंभ किया गया। साथ ही एनयूसीएफडीसी की ‘सहकार सीबीएस’ केंद्रीकृत कोर बैंकिंग प्रणाली और शहरी सहकारी बैंकों के लिए एआई आधारित संवादात्मक मंच ‘सहकार सहयोगी’ का भी अनावरण किया गया।

समारोह की प्रमुख उपलब्धियों में 50 हजार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) का ई-पैक्स में रूपांतरण रहा, जिसे सहकारी संस्थाओं के डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। इस दौरान बीज प्रणाली को मजबूत करने के लिए बीबीएसएसएल और आईसीएआर के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर भी किए गए। शाह ने डेयरी सहकारी समितियों के लिए आदर्श उप-विधियों तथा सहकारिता मंत्रालय की पांच वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित पुस्तक का भी विमोचन किया।

अपने संबोधन में शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीयता और राष्ट्रवाद की भावना को मजबूत करने के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित किया। उन्होंने कहा कि यदि मुखर्जी नहीं होते तो कश्मीर, असम और पश्चिम बंगाल का इतिहास अलग हो सकता था। उन्होंने कहा कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान के विरोध में मुखर्जी ने अपने प्राण न्योछावर किए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर उनके सपने को साकार किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार डॉ. मुखर्जी की 125वीं जयंती पूरे देश में व्यापक स्तर पर मनाएगी।

कार्यक्रम में केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सहकारिता राज्य मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर, सहकारिता एवं नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल, सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव आतिश चंद्र, पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव नरेश पाल गंगवार सहित विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय सहकारी संस्थाओं, सहकारी बैंकों, डेयरी समितियों, पैक्स तथा सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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