
MADHUBANI:- हाकिमों की मिली भगत से नगर निगम के ढोढिया तालाब पर दंबगों का दबदबा और अतिक्रमण
"लक्ष्य तक की 'पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर" अभियान
— नगर निगम क्षेत्र की तालाबों, सरोवर, कुआं की दशा को लेकर ‘लक्ष्य तक’ ने ‘पारंपरिक जल स्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान की शुरुआत की गई है। इस अभियान के तहत प्रथम चरण में नगर निगम क्षेत्र की एक तालाब की प्रतिदिन पड़ताल होगी। उम्मीद है कि जल संरक्षण के दिशा में यह अभियान शासन-प्रशासन और आम लोगों के बीच की सार्थक कड़ी साबित होगी। ‘पारंपरिक जलस्त्रोत से जल संरक्षण की सफर’ अभियान के चौथे दिन प्रस्तुत है नगर निगम क्षेत्र के ढोढिया तालाब की पड़ताल। अभियान को लेकर निगम क्षेत्र की तालाब संबंधी जानकारी हमें वाटसएप पर उपलब्ध कराई जा सकती है। जिसे ‘लक्ष्य तक’ पर जगह दी जा सकती है
मधुबनी- 24 अप्रैल। आमतौर पर तालाब वर्षा जल संरक्षण, मछली पालन और मखाना उत्पादन से किसानों की आमदनी का माध्यम रही है। जबकि इसके उलट एक दशक से तालाब दबंगों,भू-माफियाओं और अंचल कार्यालय के हाकिमों, राजस्व कर्मचारियों के लिए कमाई का जरिया बनकर रह गया। इसका अंदाजा इस तरह लगाया जा सकता है कि रहिका अंचल के सैरात सूची में शामिल मखाना और मछली उत्पादन के लिए सरकारी तालाबों का अतिक्रमण दायरा बढ़ता ही चला गया। तालाबों की जमीन का अतिक्रमण मुक्त कराने में हकिमों की उदासीनता रही है। दबंगों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से सरकारी तालाबों की जमीन फर्जी तरीके से कब्जा कर उसकी खरीद-बिक्री होती चली गई। फर्जी कागजातों के आधार पर सरकारी तालाबों की जमीन का दाखिल खारिज कराकर उसे बिक्री से भू-माफिया और अंचल कार्यालय के हाकिमों, राजस्व कर्मचारियों मालामाल होते गए।
बतादें कि नगर निगम क्षेत्र के कदम चौक स्थित खाता 672 खेसरा 952 रकवा 1.52 एकड वाली ढोढिया तालाब का अतिक्रमण बढ़ता चला गया। सैरात सूची में शामिल इस सरकारी ढोढिया तालाब की आधा से अधिक जमीन पर अतिक्रमणकारियों कब्जा कर रखा है। जिसका कुप्रभाव मछली उत्पादन पर देखा जा रहा है। तालाब के चहुंओर घाट का अभाव वर्षों से बना है। तालाब का अधिकांश भाग जलकुंभी व गंदगी से पटा है। अतिक्रमण के चलते इसकी सफाई नहीं हो पाती है। जिससे छठ पूजा पर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। छठ पूजा पर तालाब की नाममात्र सफाई कराई जाती है लेकिन सालों से अतिक्रमण खाली नहीं कराई जाती है। इस बीच निगम क्षेत्र की 32 सरकारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की जिलाधिकारी के सख्त निर्देश से अतिक्रमण खाली होने की उम्मीद की जा रही है।



