
भागवत पुराण में कलियुग के अंत में जल-प्रलय का वर्णन, बिना बारिश के ग्लेशियर झील का फटना प्रलय का संकेत : अनू झा
मधुबनी- 30 अगस्त। नेपाल में बिना बारिश के अचानक 15 से 20 फीट तक भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ना कोई सामान्य बाढ़ नहीं है, शास्त्रों में इसे माता के रौद्र रूप और जल-प्रलय की आहट बताया गया है। हस्तरेखा विशारद, एवं वास्तु सलाहकार अनू झा का कहना है कि धर्मशास्त्रों में कहा गया है – ‘गंगे च यमुने चैव गोदावरी सरस्वती, नर्मदा सिंधु कावेरी जलेस्मिन सन्निधिं कुरु’। नदियां केवल जल नहीं, माता हैं। जब माता पर अत्याचार होता है। पहाड़ों को तोड़कर उसका रास्ता रोकने पर माता अपना रौद्र रूप दिखाती हैं। भोटेकोशी वही पवित्र नदी है जो आगे चलकर बिहार में कोसी बनकर मिथिला में आती है। उन्होंने कहा कि नेपाल में आई GLOF बाढ़ को 28 अगस्त को लगे चंद्र ग्रहण से जोड़कर देखा जा रहा है। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि ग्रहण से 15 दिन पहले और 15 दिन बाद तक प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है। ग्रहण का असर घटना से पहले ही दिखना शुरू हो जाता है। यह सिर्फ नेपाल की बाढ़ नहीं, बल्कि 28 अगस्त के चंद्र ग्रहण की पहली चेतावनी थी। इस बार 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण शतभिषा नक्षत्र में लगा था।
ज्योतिष में शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु हैं। राहु को भ्रम, अचानक दुर्घटना और अप्रत्याशित घटनाओं का कारक कहा गया है। बिना किसी बारिश के अचानक ग्लेशियर झील का फट जाना, राहु की ही माया है। ज्योतिष में उत्तर दिशा को चंद्रमा और हिमालय की दिशा माना गया है। इस ग्रहण में चंद्रमा राहु से पीड़ित है। उत्तर के हिमालयी क्षेत्र नेपाल, तिब्बत, सिक्किम में जल प्रलय का योग बन रहा है। सावन-भादो में जब ग्रहण लगता है तो शास्त्रों में इसे ‘जल-तांडव योग’ कहा गया है। पुराणों में लिखा है कि इस योग में नदियां अपना किनारा तोड़ती हैं। आने वाला पितृ पक्ष और हाल का ग्रहण भी जल-तत्व को बुरी तरह प्रभावित करता है। ज्योतिष में जल प्रलय को पितृ दोष से भी जोड़कर देखा जाता है, जब प्रकृति की शुद्धि नहीं होती। यह चेतावनी है कि ग्रहण के बाद 15 दिन तक कोसी, गंडक क्षेत्र में भी जल प्रलय, भूस्खलन और भूकंप के झटकों से सावधान रहना होगा।
उन्होंने कहा कि शिव पुराण में स्पष्ट कहा गया है कि हिमालय साक्षात शिव का निवास है। जब अधर्म बढ़ता है तो तांडव होता हैं। देवभूमि हिमालय में मांस-मदिरा, अश्लीलता और अनाचार से देवभूमि अशुद्ध हो रही है।ग्लेशियर का फटना (GLOF) इसी का परिणाम है। भागवत पुराण में कलियुग के अंत में जल-प्रलय का वर्णन है। बिना बारिश के ग्लेशियर झील का फटना प्रलय का संकेत है।



