
BIHAR:- दस्तावेजों और विभागीय पोर्टल पर स्कूल के नाम के साथ ‘उर्दू’ दर्ज, प्राचार्य कर रही मनमानी: नजरे आलम
दरभंगा- 22 सितंबर। ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं जनता दल यूनाइटेड, बिहार के सदस्य नजरे आलम ने मंगलवार को केवटी विधानसभा क्षेत्र के दिघियार गांव स्थित उर्दू माध्यमिक विद्यालय का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने प्राचार्य कल्पना पाठक, ग्रामीणों, छात्रों एवं विद्यालय से जुड़े लोगों से मुलाकात कर विद्यालय की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी ली।
नजरे आलम ने कहा कि पिछले कई दिनों से यह मामला सामने आ रहा है कि विद्यालय की मोहर से ‘उर्दू’ शब्द हटा दिया गया है। इसके अलावा शुक्रवार (जुमा) की छुट्टी को समाप्त कर रविवार की छुट्टी किए जाने की बात भी सामने आई है।
उन्होंने कहा कि विद्यालय के पूर्व प्राचार्य की मोहर में भी ‘उर्दू’ शब्द स्पष्ट रूप से दर्ज है। वहीं विद्यार्थियों के एडमिट कार्ड, प्रमाण-पत्र, विद्यालय के आमंत्रण पत्र तथा अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों में भी विद्यालय के नाम के साथ ‘उर्दू’ दर्ज है। विभागीय पोर्टल पर भी विद्यालय का नाम ‘उच्च माध्यमिक विद्यालय दिघियार उर्दू’ दर्ज होने की बात सामने आई है।
नजरे आलम ने कहा कि जब उपलब्ध सरकारी एवं विद्यालयी दस्तावेजों में विद्यालय की पहचान के साथ ‘उर्दू’ दर्ज है, तो किसी प्राचार्य द्वारा अपनी ओर से विद्यालय की मोहर और पहचान से ‘उर्दू’ हटाने का निर्णय किस आधार पर लिया गया, यह गंभीर सवाल है।
उन्होंने कहा कि यदि नई प्राचार्य की नियुक्ति सामान्य विद्यालय के लिए हुई है, तो उन्हें उर्दू विद्यालय में पदस्थापित किए जाने का निर्णय विभाग का विषय है। लेकिन पदस्थापन के बाद विद्यालय की स्थापित पहचान और सरकारी अभिलेखों में दर्ज नाम में अपनी इच्छा से बदलाव करना उचित नहीं है।
नजरे आलम ने शिक्षा विभाग एवं जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, विद्यालय के मूल नाम एवं अभिलेखीय पहचान को स्पष्ट करने तथा यदि नियमों के विरुद्ध कोई बदलाव किया गया है तो उसे तत्काल दुरुस्त कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि उर्दू बिहार की दूसरी सरकारी भाषा है और उर्दू विद्यालय की पहचान से जुड़े किसी भी बदलाव को मनमाने तरीके से स्वीकार नहीं किया जा सकता। साथ ही विद्यार्थियों एवं ग्रामीणों की भावनाओं का भी सम्मान होना चाहिए।
नजरे आलम ने कहा कि उन्होंने ग्रामीणों और छात्रों के बीच जाकर पूरे मामले की वास्तविक स्थिति को समझने का प्रयास किया है। अब शिक्षा विभाग को उपलब्ध दस्तावेजों एवं विभागीय नियमों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।



