
दरभंगा राज परिसर के मंदिरों के लोकार्पण बाद मधुबनी में कुमार कपिलेश्वर सिंह से बढ़ी उम्मीद, उनके आगमन की उठी मांग
मधुबनी- 01 सितंबर। बिहार के दरभंगा राज परिसर में जीर्णोद्धार कराए गए प्राचीन मंदिरों का राज परिवार के कुमार कपिलेश्वर सिंह द्वारा भव्य लोकार्पण के बाद कुमार कपिलेश्वर सिंह से मधुबनी के लोगों की उम्मीद बढ़ गई है। इस संदर्भ में संस्कार संस्कृति संरक्षण समिति ने मांग की है कि एक बार कुमार कपिलेश्वर सिंह का मधुबनी आगमन होना चाहिए। उनके आगमन से मधुबनी के उपेक्षित धार्मिक स्थलों को भी नई पहचान मिलेगी। समिति के उपाध्यक्ष संजीव कुमार ने बताया कि मधुबनी शहर के भौआड़ा गढ़ काली मंदिर के अलावा शहर के हृदय स्थल गंगासागर काली मंदिर परिसर की स्थिति से भी कुमार कपिलेश्वर सिंह को अवगत कराया जाना चाहिए। ताकि दरभंगा राज परिसर की तरह ही मधुबनी के इन सिद्धपीठों का भी संरक्षण और विकास संभव हो सके।
उन्होंने कहा कि दरभंगा राज परिवार का सनातन धर्म के लिए योगदान मिथिला ही नहीं, पूरे भारत में अतुलनीय माना जाता है। यह इतिहास अब धीरे-धीरे सामने आ रहा है। दरभंगा, मधुबनी, नेपाल तक में दरभंगा महाराज ने सैकड़ों शिवालय, काली मंदिर,दुर्गा मंदिर बनवाए। किसी काल में मंदिर टूट रहे थे, तब दरभंगा राज ने ही उन्हें अपने खर्च से फिर से खड़ा किया।महाराज लक्ष्मीश्वर सिंह और रामेश्वर सिंह ने दरभंगा में संस्कृत विश्वविद्यालय, धर्मशास्त्र के पुस्तकालय और सैकड़ों संस्कृत विद्वानों को संरक्षण दिया। काशी के बाद सबसे ज्यादा पंडितों का सम्मान दरभंगा दरबार में होता था।
उन्होंने कहा कि साल 1897 के अकाल हो या 1934 का भूकंप, राज ने अपना कोष प्रजा और मंदिरों के लिए खोल दिया। राजमहल से ज्यादा खर्च धर्मशाला, तालाब और मंदिरों पर किया गया। दरभंगा राज को ‘गौ-ब्राह्मण प्रतिपालक’ कहा जाता था। कुमार कपिलेश्वर सिंह द्वारा उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मंदिरों का जीर्णोद्धार कराना, उसी इतिहास को फिर से जीवंत करना है।



