
नवग्रह गोचर का 12 राशियों के जरिए लोगों पर पड़ता सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव : आभा झा
मधुबनी – 09 अगस्त। वास्तु विज्ञान व हस्तरेखा विशेषज्ञ ज्योतिषी आभा झा ने कहा कि ग्रह, गोचर से ही विवाह और अन्य मांगलिक कार्य के लिए प्रत्येक साल की तिथियां निर्धारित होती है। हरेक साल पृथ्वी घूमती है। इसी आधार पर ग्रह, गोचर की गणना से पंचांग बनते हैं। पंचाग में साल भर के लिए विवाह व अन्य मांगलिक कार्य के लिए तिथियां और शुभ मुहूर्त निर्धारित होते हैं। ग्रह गोचर का ही प्रभाव है कि हरेक साल दुर्गा पूजा, दीपावली, जन्माष्टमी, छठ सहित साल भर के अन्य पर्व-त्योहार की तिथियां बदल जाती है। इस प्रकार ग्रह गोचर के प्रभाव को नकारा नहीं जा सकता है।
मधुबनी जिले के भवानीपुर में सेमिनार को संबोधित करते हुए आभा झा ने कहा कि सभी ग्रह एक अवधि के बाद ग्रह गोचर, वक्री, नक्षत्र परिवर्तन, उदय और अस्त होते हैं। ग्रहों की इन स्थिति का प्रभाव सभी 12 राशियों मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ, मीन पर सकारात्मक व नकारात्मक रूप से पड़ता है। जब एक ग्रह एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे ग्रह गोचर या राशि परिवर्तन कहा जाता है। सबसे महत्वपूर्ण ग्रह सूर्य के बाद उपग्रह चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु है। सभी ग्रह एक निश्चित अवधि के बाद राशि परिवर्तन करते हैं, जिसका प्रभाव सभी राशियों के स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति, कार्यक्षेत्र आदि पर पड़ता है। राहु और केतू को छाया ग्रह माना जाता है।
ज्योतिष विज्ञाम के अनुसार ब्रह्माण्ड में विचरण कर रहे खगोलीय पिंड का प्रभाव प्रकृति, पृथ्वी और सभी जीवों पर अलग-अलग प्रकार से पड़ता है। सभी ग्रह व्यक्ति के जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं। सूर्य एक माह के बाद राशि परिवर्तन करते हैं। वहीं, चंद्र गोचर करने में सवा दिन लेते हैं। मंगल करीब डेढ़ महीने के बाद राशि परिवर्तन करते हैं, वहीं एक राशि से दूसरी राशि में जाने के लिए बुध 14 दिन और देव गुरु बृहस्पति एक साल का समय लेते हैं। शुक्र ग्रह को राशि परिवर्तन में 23 दिन लगता है। शनि देव ग्रह गोचर में सबसे अधिक ढाई साल का समय लेते हैं। छाया ग्रह राहु और केतु राशि परिवर्तन में डेढ़ साल का समय लेते हैं। सूर्य ग्रहों के राजा है और इनका प्रभाव राशियों और ग्रहों की स्थिति पर भी पड़ता है। सूर्य के निकट पहुंचने वाले ग्रह सूर्य के तेज से प्रभावहीन हो जाता है। अधिकांश समय में सभी ग्रह समान्य दिशा में विचरण करते हैं, लेकिन जब कोई ग्रह उल्टी दिशा में गोचर करते हैं तो इसे वक्री ग्रह कहा जाता है। सूर्य और चंद्र के बजाय अन्य सभी ग्रह वक्री होते हैं। राहु व केतु हर समय वक्री चाल चलते हैं। ग्रहों के वक्री होने से सभी राशियों के भविष्यफल में बदलाव होता है।
रिपोर्ट कपिलेश्वर साह



