
मधुबनी में हर्षोल्लास से मनाई गई अनंत चतुर्दशी, श्रद्धालुओं ने धारण किया अनंत
मधुबनी- 25 सितंबर। भादो मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के अवसर पर जिले भर में अनंत चतुर्दशी की पूजा हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुई। शिवालयों और घरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। लोगों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अनंत धारण किया।
जगह-जगह सामूहिक रूप से अनंत पूजा का आयोजन किया गया। पं. ऋषिनाथ झा ने बताया कि अनंत पूजा की शुरुआत पांडव काल से मानी जाती है। पांडवों ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर दुखों से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए अनंत व्रत रखकर अनंत की पूजा की थी। इसके बाद महर्षि कौंडिन्य और उनकी पत्नी ने भी यह व्रत किया, तब से सनातन धर्म में यह परंपरा चली आ रही है।
उन्होंने बताया कि अनंत में 14 गांठें होती हैं, जो भगवान विष्णु के 14 नामों – अनंत, पुरुषोत्तम, ऋषिकेश, पद्मनाभ, माधव, वैकुंठ, श्रीधर, त्रिविक्रम, मधुसूदन, वामन, केशव, नारायण, दामोदर और गोविंद के प्रतीक हैं। हर गांठ पर अलग-अलग नाम से भगवान विष्णु का आवाहन किया जाता है। पूजा में भगवान विष्णु को 14 प्रकार के फल, पकवान और मधु अर्पित किए जाते हैं।
पूजा के बाद श्रद्धालुओं ने मंत्र-‘अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नं समभ्युद्धर वासुदेव। अनन्तरुपे विनियोजयस्व ह्यनन्तरुपाय नमो नमस्ते।।’ के साथ अनंत धारण किया। विश्व प्रसिद्ध फेस रीडर व ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा के अनुसार, इस दिन व्रत रखने, अनंत कथा सुनने और अनंत धारण करने से सभी दुखों से मुक्ति मिलती है। जीवन में सुख-समृद्धि आती है।


