
मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करता नाटक, प्रतिभागियों में दिखी अभिनय की उमंग: ऋषि बशिष्ठ
मधुबनी – 29 जून। भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मधुबनी द्वारा आयोजित 20 दिवसीय नाट्य कार्यशाला भारतेन्दु हरिश्चन्द्र लिखित ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ नाटक के मंचन के साथ सम्पन्न हुआ। नाट्य कला के विविध आयामों अभिनय, मंचन, संवाद,उत्सर्जन,आंदोलन और लोकनाट्य तकनीकों में प्रशिक्षण प्रदान करने का उद्देश्य सामने आया। कार्यशाला में नाट्य शास्त्र में स्नातकोत्तर और यूजीसी नेट उत्तीर्ण प्रभात रंजन के निर्देशन में कार्यशाला में दो दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
भाग लेने वाले कलाकारों में आदित्य, ऋषभ, नित्या, पुष्ण, अभिषेक,सुधांशु, सोनाली’ तन्मय, गायत्री, प्रियांशी,अश्विनी, अंकित, कल्याण,साक्षी,कल्याणी ने अपनी भूमिकाओं का बखूबी निर्वहन किया। बच्चों द्वारा नाट्य कला के विभिन्न अवयवों के समुचित प्रयोग से कार्यशाला की महत्ता स्पष्टत झलक रही थी। समापन समारोह को संबोधित करते हुए चर्चित साहित्यकार रंग निर्देशक ऋषि बशिष्ठ ने कहा कि कार्यशाला ने ग्रीष्मकालीन अवकाश का सर्वोत्कृष्ट उपयोग किया है। नाट्य मंचन और अभिनय की उमंग का उद्देश्य कला के माध्यम से भावनाओं,सामाजिक संदेशों और मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करना है। यह चरित्र में गहराई तक उतरकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देने की अद्भुत प्रक्रिया है।
नाटक से व्यक्ति का सर्वोन्मुखी विकास होता है। अलीगढ़ विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. कमला नंद झा ‘विभूति’ ने कहा कि अंधेर नगरी नाटक की प्रासंगिकता 150 साल पहले भी और आज भी बरकरार है। हिन्दी साहित्य के चर्चित और सर्वकालिक महत्व वाले पांच प्रमुख नाटकों में यह एक प्रमुखतम है। इप्टा के राष्ट्रीय सचिव इन्द्रभूषण रमण ‘बमबम’ ने नाटक में प्रयुक्त संवादों के महत्व को विश्लेषित किया। इप्टा मधुबनी अध्यक्ष अरविंद प्रसाद ने कार्यशाला के निर्देशक एवं प्रतिभागियों की प्रशंसा की। कार्यक्रम में इप्टा मधुबनी के पदाधिकारी एवं कलाकारों में अमित कुमार महासेठ, अजयधारी सिंह, हेमकर झा,अमित कुमार,मो. संगम,अभिषेक आकाश, वैदेही सोनी, रंजीत राय, रमेश कुमार,सिमरन,तन्नू कुमारी सहित बच्चों के अभिभावकों ने हिस्सा लिया।



