
कांग्रेस 1947 में एक बार अड़ गई होती तो देश का विभाजन नहीं होता: CM आदित्यनाथ
अयोध्या- 14 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को एक बार फिर कांग्रेस व सपा पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि 1947 में कांग्रेस एक बार अड़ गई होती तो देश का विभाजन नहीं होता। वहीं, यदि उस समय कोई नरेंद्र मोदी जैसा प्रधानमंत्री होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता।
उन्होंने सपा सरकार में हिंदुओं के हत्यारों को मिली राहत और श्रीराम जन्मभूमि के खिलाफ की गई पैरवी का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामद्रोहियों से अंतिम दम तक निपटेंगे। उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में परमहंस रामचंद्र दास महाराज के योगदान को याद किया।
परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की 23वीं पुण्यतिथि पर शुक्रवार को दिगंबर अखाड़े में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रदेश के सभी राम भक्तों की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने बताया कि पूज्य महाराज के जीवन का एक ही ध्येय था कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण हो। 1949 से लेकर उनके भौतिक शरीर के रहने तक महाराज का पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के लिए समर्पित रहा।
सीएम ने कहा कि इतिहास केवल पढ़ने और परीक्षा में प्रश्नपत्र का उत्तर देने का माध्यम नहीं होता है। इतिहास एक प्रेरणा और सबक भी होता है। इससे जुड़े क्षणों से गर्व की अनुभूति होती है व आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। जब भी हम उसकी अनदेखी करते हैं, इसका मतलब है कि हम अतीत की उन गलतियों को दोहराने का फिर से प्रयास कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1947 में अगर कांग्रेस एक बार अड़ गई होती, तो देश का विभाजन नहीं होता। कोई लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल या नरेंद्र मोदी जैसा देश का प्रधानमंत्री होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता। कश्मीर में शांति, अनुच्छेद 370 की समाप्ति, देश के अंदर माओवाद और नक्सलवाद की समाप्ति जैसे कई अहम मुद्दे इनकी पीड़ा है क्योंकि ये इनकी कमाई के जरिया थे। देश को अस्थिर करने का यही माध्यम था। आज भारत का नागरिक कहीं बाहर जाता है, तो दुनिया में सम्मान पाता है। यह सम्मान यूपीए सरकार के समय में नहीं था।
उन्होंने कहा कि तब सनातन धर्म की चर्चा नहीं होती थी। अयोध्या में राम मंदिर, काशी में काशी विश्वनाथ धाम नहीं बन पाया था। वहीं, मथुरा-वृंदावन सजते नहीं थे। पूर्व में समाजवादी पार्टी के नेता ने कहा था कि सरकार आएगी तो सपा कंस की मूर्ति लगाएगी। इसके बाद श्री वृंदावन बिहारी ने उनको हमेशा के लिए ही विदा कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1526 में आज से 500 वर्ष पहले आज के संभल में श्री हरिहर मंदिर को तोड़कर एक गुलामी का ढांचा खड़ा कर दिया गया। अगर 1526 में उसका प्रतिकार एकजुट होकर संभल में हुआ होता, तो वर्ष 1528 में अयोध्या में उसे दोहराने का दुस्साहस कोई नहीं करता। मात्र दो वर्ष में अयोध्या में प्रभु श्रीराम के मंदिर को क्षतिग्रस्त करने के साथ सनातन धर्मावलंबियों को अपमानित करते हुए गुलामी का ढांचा खड़ा किया गया। वहीं, 14 अगस्त 1947 को आजादी के एक दिन पहले केवल हिंदू और सिख ही नहीं कटे थे, भारत भी कटा था।
सीएम ने कहा कि आज भी पाकिस्तान और बांग्लादेश के अंदर निर्दोष हिंदू मारे-काटे जाते हैं। देश के अंदर कुछ राजनेता वहां की घटना पर कुछ नहीं बोलते, जो यहां की हर घटना में हाय-तौबा करते घूमते हैं। उन्होंने पूछा कि 14 अगस्त 1947 की घटना के लिए किसकी जवाबदेही थी। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, उनको सत्ता चाहिए थी, देश की प्रजा से कोई लेना-देना नहीं था। आज भी वही स्थिति है। नाम, चेहरे बदले गए, लेकिन काम करने का तरीका अभी भी वही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संभल के बारे में हमेशा से मान्यता थी कि वहां जाने लायक स्थिति नहीं है। संभल को जिला बने हुए लगभग 30 साल हो गए, उसका मुख्यालय नहीं बन पाया था। संभल में न्यायालय के आदेश पर एक टीम सर्वे करने गई थी। इसी को लेकर उपद्रव किया गया। उपद्रव में निशाना पुलिसकर्मी और निर्दोष हिंदू थे। 1947 से कमोबेश कोई वर्ष ऐसा नहीं बीता था, जब वहां दंगे न हुए हों। 1976 और 1978 में इतना भीषण दंगा हुआ था कि एक साथ 150 हिंदू मार दिए गए। वहीं, 1996 में तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने बड़ी बेशर्मी के साथ सभी मुकदमे वापस ले लिए। एक भी दरिंदे को सजा नहीं मिली। ये स्वतंत्र भारत में सामूहिक नरसंहार की घटना थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2024 में संभल दंगाइयों को चिन्हित कर कार्रवाई करते हुए हालात नियंत्रित किए गए। जांच में पता चला कि संभल में केवल हरिहर मंदिर ही नहीं है, वहां 67 तीर्थ, 19 कूप और 10 हजार एकड़ भूमि पर भी कब्जा हो गया था। इसे कब्जा मुक्त कराया गया। अब खाली भूमि का वहां के गरीबों, दलितों व कमजोर वर्ग के लोगों को आवंटन किया जा रहा है। वहां जिला मुख्यालय का निर्माण भी किया जा रहा है। आज संभल बदल चुका है। अब वहां दंगा नहीं होता है। शांति व सौहार्द का माहौल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व में अयोध्या को पर्वों-त्योहारों से भी वंचित किया जाता था। इसे संकरी गलियों और गंदगी का एक पर्याय बना कर रख दिया था। यहां के घाट, राम जी की पैड़ी, सरयू जी का जल सड़ता रहता था। श्रद्धालु आंख-नाक बंद कर डुबकी लगाने के लिए मजबूर थे। आज बदली हुई अयोध्या हमें त्रेता युग का स्मरण कराती है। अब यहां के हमारे संतों को देश-दुनिया में चिढ़ाया नहीं जाता है। अयोध्या का नाम सुनकर कोई व्यक्ति उन्हें पूरा सम्मान देता है। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान पूज्य संतों ने जो संघर्ष किया, वह अकल्पनीय था।
उन्होंने कहा कि रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले व राम जन्मभूमि आंदोलन के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में गुहार लगाने वाले लोग फिर साजिश कर रहे हैं। श्रीराम जन्मभूमि में चढ़ावा चोरी से संबंधित एक प्रकरण सामने आया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की सिफारिश पर एसआईटी बनी। अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई। हालांकि,आज श्रीराम जन्मभूमि के खिलाफ लड़े जाने वाले मुकदमे में लंबी-चौड़ी पैरवी करने वाले खुद को राम भक्त घोषित करने में जुटे हैं।
मुख्यमंत्री योगी ने महंत परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज से जुड़े पुराने दिनों को याद किया। बताया कि उनका 1949 से पहले से गोरक्षपीठ के साथ जुड़ाव रहा। सांसद (सीएम योगी) रहने के दौरान दिल्ली से लखनऊ आने के बाद गोरखपुर की यात्रा के बीच दिगंबर अखाड़ा में परमहंस जी महाराज से मिलना होता था। सीएम योगी ने कहा कि गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ अक्सर मुझे परमहंस जी का आशीर्वाद लेकर आने के लिए कहते थे। साथ ही बताया, परमहंस जी महाराज के अंतिम दिनों में कई बार दर्शन करने का अवसर प्राप्त हुआ। वे अक्सर राम मंदिर निर्माण के बारे में पूछते थे। सीएम ने परमहंस जी के गोरक्षपीठ आगमन की यादों का भी जिक्र किया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1990 में राम भक्तों पर जब गोलियां चलाई गईं, तो परमहंस जी महाराज ने दिगंबर अखाड़े के बाहर राम भक्तों का स्मारक बनाने का ऐलान किया था। इसके बाद डंके की चोट पर उन्होंने स्मारक बनवाने का काम किया, उस वक्त सरकार भी रोक नहीं पाई थी। राम भक्ति का यह उद्भट स्वरूप देखने को बहुत कम मिलता है।


