भारत

आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि का निलंबन किसानों के हित में निर्णायक कदम: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु 

नई दिल्ली- 14 अगस्त। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शुक्रवार को कहा कि आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ अतीत में की गई सिंधु जल संधि का निलंबन भारत के, विशेषकर किसानों के हित में एक निर्णायक कदम है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में सशस्त्र बलों ने अपनी अचूक क्षमता और अदम्य पराक्रम का परिचय दिया है।

80वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि सत्य और न्याय के पक्ष में तथा मानवता विरोधी शक्तियों पर विजय प्राप्त करने की भारतीय परंपरा पर देश को गर्व है। उन्होंने 26 जुलाई को मनाए गए कारगिल विजय दिवस और 07 मई को ऑपरेशन सिंदूर के आरंभ का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर भारतीय सेनाओं के पराक्रम को याद किया।

मुर्मु ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं की अचूक क्षमता का प्रमाण है। आतंकियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि वे कहीं भी छिप जाएं, उन्हें अपने कृत्यों की सजा अवश्य मिलेगी।

उन्होंने कहा कि दशकों से नक्सलवाद देश के लिए गंभीर चुनौती बना हुआ था लेकिन भारत को नक्सलवाद से मुक्त करना बड़ी उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब उत्साह का माहौल है और विकास की धारा पहुंच रही है। उन्होंने बस्तर ओलिंपिक्स और बस्तर पंडुम में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों, कलाकारों और दर्शकों की भागीदारी का उल्लेख किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र गौरव की रक्षा से जुड़ी मराठा सैन्य परंपरा के 12 दुर्गों को पिछले वर्ष यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जबकि इस वर्ष भगवान बुद्ध के प्रथम उपदेश स्थल सारनाथ को भी इस सूची में स्थान मिला।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत का वास्तविक लक्ष्य सभी भारतीयों का विकास और कल्याण है। तेलुगु के राष्ट्रवादी साहित्यकार गुरजाडा अप्पाराव की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि देश केवल मिट्टी नहीं बल्कि उसमें रहने वाले लोग हैं।

मुर्मु ने विश्वास जताया कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव और नगर-नगर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे। उन्होंने देशवासियों से स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करने का आह्वान किया।

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