
झारखंड में ऐसी परीक्षा व्यवस्था बनाएंगे, जिस पर अभ्यर्थी को भरोसा हो: मुख्यमंत्री
रांची- 15 अगस्त। झारखंड की राजधानी रांची में शनिवार को 80वें स्वतंत्रता दिवस का मुख्य समारोह गरिमापूर्ण माहौल में आयोजित किया गया। प्रदेश के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मोरहाबादी मैदान में तिरंगा फहराया और परेड का निरीक्षण किया। समारोह के दौरान पहली बार राष्ट्रगीत का पूरा अंतरा गाकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया। इसके बाद राष्ट्रगान हुआ और मुख्यमंत्री ने राज्य की जनता को संबोधित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में झारखंड की पहचान, युवाओं के भविष्य, परीक्षा व्यवस्था, रोजगार, कृषि, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य समेत सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा। उन्होंने कहा कि झारखंड केवल भारत का एक राज्य नहीं, बल्कि देश की आदिवासी चेतना का केंद्र है। राज्य की पहचान केवल खनिज संपदा से नहीं, बल्कि पारंपरिक ज्ञान, सांस्कृतिक समृद्धि, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और सामाजिक न्याय पर आधारित विकास मॉडल से बननी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में झारखंड यह उदाहरण पेश कर सकता है कि विकास और प्रकृति, आधुनिकता और परंपरा तथा उद्योग और पर्यावरण के बीच टकराव जरूरी नहीं है। संतुलित विकास के माध्यम से इन सभी के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जा सकता है।
युवाओं के भविष्य और परीक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर—
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के अगले 25 वर्षों की सबसे बड़ी ताकत उसके युवा होंगे। युवाओं की शिक्षा, कौशल, आत्मविश्वास और सपने ही विकसित झारखंड की असली पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य के लाखों युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए मेहनत कर रहे हैं और उनके माता-पिता अपनी क्षमता से बढ़कर उन्हें शिक्षा दिला रहे हैं। ऐसे में उनकी मेहनत और प्रतिभा के साथ न्याय करना सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है।
भर्ती परीक्षाओं को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि जब परीक्षा व्यवस्था पर संदेह पैदा होता है तो केवल एक परीक्षा प्रभावित नहीं होती, बल्कि पूरी पीढ़ी का विश्वास प्रभावित होता है। उन्होंने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मेहनत को किसी माफिया, भ्रष्ट तंत्र या अनियमितता के भरोसे नहीं छोड़ा जाएगा।
हेमंत सोरेन ने कहा कि देश के कई राज्यों और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में भी प्रश्नपत्र लीक तथा परीक्षा संबंधी गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं, लेकिन दूसरे राज्यों में हुई घटनाओं से झारखंड की जिम्मेदारी कम नहीं होती। उनके लिए राज्य का युवा, उसका भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में उसका विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा संबंधी मामलों की निष्पक्ष जांच होगी और जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोई व्यक्ति कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, यदि उसकी संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि बिना प्रमाण किसी को दोषी ठहराने की राजनीति भी नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि न्याय होगा और निष्पक्ष होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल दोषियों को पकड़ना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। वास्तविक समाधान ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें भविष्य में कोई भी युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ करने का साहस न कर सके। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसमें समयबद्ध वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, पारदर्शी एवं तकनीक-सुरक्षित परीक्षा प्रणाली, उत्तर-कुंजी और ओएमआर की समयबद्ध उपलब्धता तथा परीक्षा प्रक्रिया में बहुस्तरीय जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाना चाहती है, जिसमें पारदर्शिता अपवाद नहीं, बल्कि नियम हो। इसके लिए ‘छात्रों की बात-छात्रों के साथ’ अभियान शुरू किया गया है। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, शिक्षाविदों और अभिभावकों से परीक्षा सुधार की प्रक्रिया में भागीदार बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों से मिले सुझावों का विशेषज्ञों के साथ अध्ययन किया जाएगा और जो सुझाव नियमों तथा संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप होंगे, उन्हें लागू करने का प्रयास किया जाएगा।
रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर जोर—
मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजगार सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी रिक्त पदों को भरना नहीं, बल्कि ऐसा झारखंड बनाना है जहां सरकारी सेवाओं के साथ उद्योग, एमएसएमई, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा हों।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी), झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और अन्य भर्ती एजेंसियों के माध्यम से बड़ी संख्या में नियुक्ति प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा। इससे युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ परीक्षा व्यवस्था पर उनका विश्वास भी मजबूत होगा।
सोरेन ने युवाओं से अपनी मेहनत पर भरोसा बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनका परिश्रम व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों की रक्षा करना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि उनका व्यक्तिगत दायित्व भी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करेगी, जिस पर अभ्यर्थी और समाज दोनों को विश्वास हो तथा देश झारखंड की व्यवस्था को उदाहरण के रूप में देखे।
कृषि को लाभकारी बनाने की योजना—
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड की आत्मा उसके खेतों में बसती है और किसान राज्य की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। सरकार सिंचाई, बीज, समर्थन मूल्य, कृषि यंत्रीकरण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को मजबूत करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि ‘बिरसा हरित ग्राम योजना’ के तहत राज्य में लगभग 2.15 लाख एकड़ में वृक्षारोपण किया गया है और करीब तीन लाख परिवारों को आजीविका के नए साधनों से जोड़ा गया है। योजना के तहत उत्पादित आम का विदेशों में भी निर्यात किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल खेती को सहारा देना नहीं, बल्कि इसे किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय बनाना है। आने वाले वर्षों में किसानों को धान उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय कृषि उद्यमी बनाने पर जोर दिया जाएगा। फल-सब्जी, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन, कुक्कुट पालन, बकरी पालन, मधुमक्खी पालन, लाह,तसर,मिलेट,औषधीय पौधों और लघु वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को गति देने की योजना है।
महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता—
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। सरकार सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य और आर्थिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। उन्होंने ‘मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना’ का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना पिछले तीन वर्षों से महिलाओं के लिए आर्थिक सहारा बनी हुई है। योजना के तहत 2,500 रुपये प्रतिमाह की नियमित वित्तीय सहायता से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपनी उद्यमशीलता को विकसित करने में मदद मिली है।
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार—
सोरेन ने कहा कि स्वास्थ्य केवल बीमारी के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की गुणवत्ता का आधार है। सरकार का लक्ष्य ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था तैयार करना है, जिसमें शहर और गांव दोनों के लोगों को समान चिकित्सा सुविधाएं मिलें। उन्होंने कहा कि आधुनिक अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, नर्सिंग शिक्षा, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं, टेलीमेडिसिन और प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। पंचायतों में दवा दुकान खोलने की योजना के साथ राज्य की सभी पंचायतों को समर्पित एंबुलेंस सेवा उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका संचालन स्थानीय ग्राम एवं पंचायत प्रतिनिधियों के माध्यम से किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सुपर स्पेशियलिटी रिम्स-2 का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा पूर्वी सिंहभूम, खूंटी, गिरिडीह, देवघर, जामताड़ा और धनबाद में छह नए चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण की कार्रवाई चल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार बीमारी के इलाज से अधिक रोकथाम, पोषण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मानसिक स्वास्थ्य और जनस्वास्थ्य जागरूकता पर जोर दे रही है। लक्ष्य ऐसा झारखंड बनाना है, जहां प्रत्येक नागरिक को यह विश्वास हो कि गंभीर बीमारी के समय भी सरकार उसके साथ खड़ी है।
विकास के साथ प्रकृति और परंपरा का संतुलन—
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसा झारखंड बनाना चाहती है, जहां विकास की पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं, बल्कि ऊंचे अवसरों से हो और प्रगति केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में दिखाई दे।
उन्होंने कहा कि राज्य के युवा झारखंड की नई पहचान लिखेंगे और इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने समृद्ध, संवेदनशील, आधुनिक, अपनी जड़ों से जुड़ा और न्यायपूर्ण झारखंड बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
सोरेन ने कहा कि यही स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों का सम्मान होगा। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धो-कान्हू, तिलका मांझी, फूलो-झानो, चांद-भैरव, शेख भिखारी, नीलांबर-पीतांबर, बिनोद बिहारी महतो, निर्मल महतो और दिशोम गुरु शिबू सोरेन सहित महान व्यक्तित्वों के संघर्ष को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनके सपनों के अनुरूप झारखंड के निर्माण के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।



