
MADHUBANI:- नगर निगम क्षेत्र के 32 सरकारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने में टाल-मटोल रवैया अपना रही नगर निगम प्रशासन
मधुबनी- 30 मई। नगर निगम क्षेत्र के 32 सरकारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने में नगर निगम प्रशासन की टाल-मटोल रवैया सामने आने लगा है। बतादें कि निगम क्षेत्र के 32 सरकारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराते हुए उसके सौंदर्यीकरण के लिए दिनांक 30 अप्रैल को शहर के प्रसिद्ध अधिवक्ता राकेश रंजन झा द्वारा जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय में लोक शिकायत निवारण अधिकार अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज कराया गया था। इस मामले में जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय द्वारा नगर आयुक्त को नोटिस भेजकर जवाब मांगा गया था। इस मामले में 26 मई को नगर आयुक्त द्वारा जिला लोक शिकायत निवारण कार्यालय को समर्पित प्रतिवेदन में नगर निकाय क्षेत्र में अवस्थित सरकारी तालाब जिला मत्स्य पदाधिकारी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी कार्यालय के अधीन होने की पुष्टि करते हुए सभी 32 सरकारी तालाबों पर नगर निगम कार्यालय के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन नहीं होने की बात बताई है। नगर आयुक्त द्वारा समर्पित प्रतिवेदन में निगम क्षेत्र के सरकारी 32 तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने की जिम्मेदारी से बचते हुए इसे जिला मत्स्य विभाग कार्यलय पर थोपने का प्रयास किया गया है।
अधिवक्ता राकेश रंजन झा ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में आने वाले सरकारी तालाबों का रखरखाव और संरक्षण से नगर निगम प्रशासन पीछे नहीं हट सकती है। जल जीवन हरियाली योजना के तहत पूर्व में नगर निगम द्वारा शहर के सूड़ी स्कूल तालाब, गोवा पोखर तालाब, तिलक चौक तालाब और नगर निगम तालाब का जीर्णोद्धार की योजना बनाई जा चुकी है। पिछले साल नगर निगम द्वारा नगर निगम तालाब का जीर्णोद्धार कार्य कराया गया। जिसपर करीब 20 लाख खर्च किए गए है। अधिवक्ता ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र के अतिक्रमित 32 सस्कारी तालाबों को अतिक्रमण मुक्त कराने के साथ इसके सौंदयोंकरण कार्य किया जाना निहायत आवश्यक है।
निगम क्षेत्र के 32 तालाब अतिक्रमित हैं। स्थानीय लोगों ने अवैध रुप से घर, दुकान और प्रतिष्ठान बना रखा है। मिट्टी भराई का कार्य भी किया गया है। कई तालाबों में स्थानीय लोगों द्वारा गंदगी-कचड़ा भी फेंका जाता है। लोगों के घर का गंदा पानी तालाब में ही बहाया जाता है। लेकिन नगर निगम के पदाधिकारी अतिक्रमित तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने की दिशा में कोई विशेष पहल नहीं कर रहे हैं। ना ही तालाबों की उड़ाही की जा रही है। तालाब से कचड़ा, गाद, जलकुंभी नहीं निकाला जा रहा है। कई तालाबों में लोग गंदगी और कुड़ा-करकट भी फेक देते है, मगर उसे रोकने के लिए भी नगर निगम प्रशासन कोई प्रयास नहीं कर रहा है। जिससे प्रतीत होता है कि सरकारी पदाधिकारी सरकारी तालाब व उसकी जमीन की रक्षा करने में अभिरुचि नहीं रख रहे हैं।
अधिवक्ता ने बताया है कि नगर निगम क्षेत्र का जल स्तर दिनों-दिन गिरता जा रहा है। नगर निगम पारंपरिक जल श्रोतों की रक्षा न करके वर्षा जल संचयन व संरक्षण के प्रति पूरी तरह से उदासीन है। इनमें से कई सरकारी तालाबों के किनारों पर गंदगी, कचड़ा भरे हुए हैं, जिनकी समुचित साफ-सफाई नहीं की जा रही है। निगम प्रशासन द्वारा वर्ष में सिर्फ एक बार छठ महापर्व के समय इन तालाबों के घाटों की साफ-सफाई करवाया जाता है। छठ बाद साल भर इन तालाबों की कोई सुध-बुध नहीं लिया जाता। सरकारी तालाबों का पक्का घाट का निर्माण,बिजली पोल, लाइट और लोगों के बैठने की व्यवस्था जैसी नागरिक सुविधा पर ध्यान नहीं दे रहा है। तालाबों की साफ-सफाई नहीं की जा रही है। देख-रेख और साफ-सफाईको अभाव में इन तालाबों का जल दूषित हो गया है। इन तालाबों में मछली पालन, मखाना उत्पादन कार्य भी सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। दूषित एवं गंदे जल कई तरह की बीमारियां एवं महामारी फैलने की आशंका बनी रहती हैं। जबकि ‘जल-जीचन हरियाली योजना’ ‘अमृत मिशन 2.0’ तथा ‘शहरी क्षेत्र सौदर्याकरण योजना’ के तहत नगर निगम सभी 32 तालाबों का जीर्णोद्धार करा सकता है। लेकिन इसमें लापरवाही से तालाबों का अतिक्रमण दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है।



