
MADHUBANI: ‘कथा 89 की’ रहिका के कई CO, CI और राजस्व कर्मियों की गड़बड़ी का खामियजा भुगत रहे जमीन के 47 खरीदार
मधुबनी- 10 जुलाई। खेसरा 89 को विवादित बनाने में रहिका अंचल अधिकारी, अंचल निरीक्षण और संबंधित कर्मचारियों ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। करीब दो दशक तक खेसरा 89 को नाजायज आमदनी का जरिया बनाने में संलिप्त रहिका अंचल अधिकारियों, अंचल निरीक्षकों और राजस्व कर्मचारियों ने खेसरा 89 को सुलझाने की बजाय और पेचीदा बना दिया।जिससे इन लोकसेवकों की भूमिका पर सालों पूर्व विभागीय कार्रवाई की प्रकिया शुरु किया गया था।लेकिन तत्कालीन भू-माफिया की साजिश के तहत जान-बूझकर मामला को लंबित रखा गया।
बतादें कि खेसरा 89 को बचाने के लिए दशकों तक चढ़ावा लेने वाले तत्कालीन रहिका अंचल अधिकारियों, अंचल निरीक्षकों और राजस्व कर्मचारियों को बचाने का खेला जारी रखा गया। बता दें कि अंचल स्तर पर तत्कालीन कई सीओ, सीआई और राजस्व कर्मचारियों की तत्कालीन भू-माफिया की मिली-भगत का खामियजा इस खेसरा की जमीन का निबंधन कराने का 47 लोगों को भुगतना पड़ रहा है। बता दें कि इस जमीन को क्रय करने वाले 47 लोगों पर रहिका अंचल अधिकारी द्वारा 3 जुलाई को नगर थाना में प्राथमिक दर्ज कराई गई थी। बता दें कि सूचना का अधिकार के तहत दरभंगा आयुक्त कार्यालय में साल 2008 चली एक वाद के अनुसार वर्ष 2001 में तत्कालीन जिलाधिकारी तथा सदर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा उक्त खेसरा की सरकारी भूमि मानते हुए उक्त भूखंड पर बोर्ड भी लगाने का निर्देश भी दिया गया था। लेकिन अज्ञात भू-माफिया द्वारा हटवा दिया गया।
सदर अनुमंडल पदाधिकारी के आदेश के विरुद्ध अतिक्रमण कराकर रिवीजन वाद मधुबनी न्यायालय में दायर कर दिया गया। जिसका वाद न्यायालय में चलता रहा। बाद के क्रम में पाई गई स्थितियों से स्पष्ट होता है कि रहिका अंचल कार्यालय के तत्कालीन सरकारी सेवकों एवं भू-माफियाओं के मिली-भगत से सरकारी सैरात की भूमि का अतिक्रमण किया गया है। जिसके लिए हल्का कर्मचारी, अंचल निरीक्षक व अंचल अधिकारी मुख्य रूप से जिम्मेवार है। जिसके लिए समाहर्ता के आदेशानुसार उक्त अवधि में रहिका अंचल कार्यालय में पदस्थापित तीनों लोक सेवकों पर कार्रवाई के लिए सूची की मांग की गई थी। ताकि उनके विरुद्ध अनुशानिक कार्रवाई की जा सके। लेकिन सूची उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।



