
MADHUBANI:- तालाबों में शौचालय की गंदगी का बहाव और कचरा डालने से मछलियों का रुका विकास: राम बहादुर मुखिया
मधुबनी- 14 जुलाई। रहिका अंचल के सैरात सूची में शामिल तालाबों में शौचालय की गंदगी और कचरा डालने से तालाब का पानी काफी दूषित हो गया है। जिससे मछलियों का समुचित विकास बाधित हो गया है। वहीं, मछलियों को मरने से मछली कृषक को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उक्त जानकारी रहिका अंचल मत्स्यजीवी सहयोग समिति लि. के सचिव सह कोषाध्यक्ष राम बहादुर मुखिया ने दी। उन्होंने कहा कि मछलियां मरने की घटना चकदह गुलटेनी पोखर, कीर्तन भवन पोखर, तिलक चौक तालाब सहित एक दर्जन तालाबों में हरेक साल होती रहती है। इन तालाबों का अतिक्रमण करने वालों द्वारा अपने-अपने शौचालय की गंदगी का बहाव तालाब में करते है। जबकि घरों से निकलने वाले कचरा को तालाब में फेंकते है। गंदगी और कचरा के कारण पानी की ऑक्सीजन खत्म होने से दम घुटने से मछलियां मरने लगती हैं।
इधर, मछली पालन राहुल कुमार ने बताया कि गंदगी से हानिकारक गैसें अमोनिया और हाइड्रोजन सल्फाइड बनती हैं। यह गैसें मछलियों के लिए जहर का काम करती हैं। दूषित पानी में बैक्टीरिया और वायरस पनपते हैं। इससे मछलियों को त्वचा की सड़न और पेट की बीमारियां हो जाती हैं। कचरे में मौजूद पोषक तत्व पानी में काई की मोटी परत बना देते हैं। यह परत सूरज की रोशनी और हवा को पानी के अंदर जाने से रोकती है। गंदे पानी में रहने से मछलियों के मांस में बदबू और स्वाद में बदलाव आ जाता है। इससे बाजार में उनकी कीमत गिर जाती है। तालाब को साफ रखना और प्राकृतिक तरीके अपनाना बहुत जरूरी है।



