भारत

महाराष्ट्र में ‘स्मार्ट ग्रीन ग्रिड’ योजना को मंजूरी

मुंबई- 15 मई। महाराष्ट्र में बढ़ती बिजली मांग, औद्योगिक विस्तार और हरित ऊर्जा की ओर बढ़ते रुझान को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने ‘महाराष्ट्र : एक्सेलेरेटिंग ग्रीन एनर्जी एंड स्टोरेज टेक्नोलॉजीज इंटीग्रेशन इन कनेक्टेड ग्रिड’ नामक एक महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। लगभग 12,303 करोड़ रुपये की इस योजना के लिए विश्व बैंक से 8,616 करोड़ रुपये का ऋण लेने को राज्य सरकार ने मंजूरी दे दी है।

ऊर्जा विभाग के 14 मई 2026 के शासन निर्णय के अनुसार, इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की ट्रांसमिशन प्रणाली को अधिक मजबूत बनाना, अक्षय ऊर्जा को बड़े पैमाने पर ग्रिड में एकीकृत करना, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित करना और भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं को बढ़ावा देना है। यह योजना 2026 से 2031 के बीच लागू की जाएगी। पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में बिजली की मांग लगातार बढ़ी है। कोविड के बाद अर्थव्यवस्था के तेजी से उबरने के साथ बिजली मांग में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वर्तमान में राज्य की कुल स्थापित बिजली उत्पादन क्षमता 52.5 गीगावॉट है, जिसमें से 21.8 गीगावॉट (41.6 प्रतिशत) क्षमता नवीकरणीय ऊर्जा की है। वर्ष 2023 में राज्य की अधिकतम बिजली मांग 29 गीगावॉट थी, जो 2030 तक बढ़कर 42 गीगावॉट तक पहुंचने का अनुमान है।

राज्य सरकार ने 2030 तक ऊर्जा मिश्रण में नवीकरणीय ऊर्जा का हिस्सा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन, वितरण और ऊर्जा भंडारण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर निवेश किया जाएगा। इस योजना के तहत राज्य में 40 नए उपकेंद्र और उनसे जुड़ी ट्रांसमिशन लाइनें स्थापित की जाएंगी। साथ ही मौजूदा ट्रांसमिशन प्रणाली का आधुनिकीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। 4,710 एमवीए क्षमता के पावर ट्रांसफॉर्मर और इंटरकनेक्टिंग ट्रांसफॉर्मर बढ़ाए जाएंगे। 670 एमवीएआर क्षमता के रिएक्टर और कैपेसिटर लगाए जाएंगे। इसके अलावा 600 एमवीएआर क्षमता के स्टैटिक सिंक्रोनस कंपेंसेटर स्थापित किए जाएंगे। लगभग 296 सर्किट किलोमीटर उच्च दक्षता वाले कंडक्टर लगाए जाएंगे, जिससे पुराने कंडक्टरों को बदला जाएगा। इससे ग्रिड की विश्वसनीयता और जलवायु परिवर्तन का सामना करने की क्षमता बढ़ेगी, ऐसा सरकार का दावा है।

नवीकरणीय ऊर्जा में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए राज्य में 16,000 मेगावाट-घंटे क्षमता की बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जाएगी। इसके लिए 4,000 मेगावाट क्षमता की बैटरी परियोजनाओं को ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ दी जाएगी। साथ ही डेवलपर्स को प्रति मेगावाट-घंटे 27 लाख रुपये का प्रोत्साहन भी दिया जाएगा।इसके अलावा घाटघर, कोयना, पानशेत, कोडाली, वरसगांव, मुकखेड, निवे और वरंध घाट क्षेत्रों में पंप्ड स्टोरेज परियोजनाओं के लिए तकनीकी, पर्यावरणीय और सामाजिक अध्ययन रिपोर्ट तैयार की जाएगी। सरकार का ध्यान दीर्घकालिक ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने पर विशेष रूप से केंद्रित है।

इस योजना का 70 प्रतिशत फंड विश्व बैंक के ऋण से जुटाया जाएगा, जबकि शेष 30 प्रतिशत फंड महापारेषण, महानिर्मिति, एमआरईएल और महावितरण के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।

महावितरण के लिए राज्य सरकार अगले पाँच वर्षों में 1,377 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराएगी। साथ ही विश्व बैंक ऋण की वापसी 2031 से 2045 के बीच संबंधित बिजली कंपनियों द्वारा उनके अपने वित्तीय स्रोतों से की जाएगी, जिससे राज्य सरकार पर कोई प्रत्यक्ष वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।

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