
अन्यायकारियों का संहार कर धर्म की पुनः स्थापना की भगवान परशुराम : पं. शंभूनाथ झा
मधुबनी- 18 अप्रैल। देश के प्रसिद्ध फेस रीडर और ज्योतिषाचार्य पं. शंभूनाथ झा ने कहा कि भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम ने अन्यायकारियों का संहार कर समाज में धर्म की पुनः स्थापना की। वैशाख शुक्ल तृतीया (अक्षय तृतीया) को जन्मे भगवान परशुराम की जन्मोत्सव देश-दुनिया में काफी हर्षोल्लास के बीच रविवार को मनाई जाएगी। पं. झा ने बताया कि शिव के परम भक्त, अस्त्र-शस्त्र में निपुण और न्यायप्रिय योद्धा भगवान परशुराम को ब्राह्मण ज्ञान और क्षत्रिय पराक्रम का संगम माना जाता है। उनका मूल नाम ‘राम’ था,भगवान शिव द्वारा दिए गए परशु (कुल्हाड़ी) को धारण करने से ‘परशुराम’ कहलाए। उनकी शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं महर्षि ऋचीक के आश्रम में हुई।
शस्त्र और युद्ध कला में अद्वितीय निपुण भगवान परशुराम ने भगवान शिव की कठोर आराधना की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें अमोघ परशु, त्रैलोक्य विजय कवच और कल्पतरू मंत्र प्रदान किया। जब राजा कर्तावीर्य अर्जुन ने उनके पिता जमदग्नि का अपमान किया और कामधेनु को छीन लिया, तब परशुराम ने अन्याय के विरुद्ध शस्त्र उठाया। परशुराम महाभारत काल में भी सक्रिय थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण तथा कर्ण को धनुर्विद्या की शिक्षा दी थी। महान न्यायप्रिय देवता के रुप में उन्होंने दुष्टों का नाश किया। उनका अवतार दुष्टों का विनाश करने के लिए हुआ था।



